सर्वोच्च न्यायालय ने निजी अस्पतालों द्वारा कैंसर की दवाओं पर लगाए जा रहे अत्यधिक मुनाफे पर चिंता व्यक्त करते हुए इसे “अन्याय” बताया और सभी दवाओं पर एक समान 16 प्रतिशत मार्जिन लागू करने की वकालत की। न्यायधीश विक्रम नाथ और संदीप मेहता की पीठ ने केंद्र सरकार से उन आरोपों की जांच करने को कहा कि कॉर्पोरेट अस्पताल मरीजों को अपनी या नामित फार्मेसियों से दवाएं खरीदने के लिए बाध्य करते हैं। पीठ ने कहा कि इस तरह की प्रथा मरीजों और करदाताओं पर बोझ डाल सकती है, विशेषकर तब जब इलाज सरकारी योजनाओं के अंतर्गत सम्मिलित किया जाता है।
न्यायालय औषधि (मूल्य नियंत्रण) आदेश, 2013 के अंतर्गत दवाओं की कीमतों, जेनेरिक दवाओं और चिकित्सा उपकरणों के नियमन से संबंधित याचिकाओं पर सुनवाई कर रहा था। इसने बाजार के एक बड़े हिस्से का निर्माण करने वाली गैर-अनुसूचित दवाओं के मूल्य निर्धारण पर भी सवाल उठाया। न्यायालय ने कहा कि इस मुद्दे की गहन जांच की जाएगी। मामले की अगली सुनवाई 12 अक्टूबर को होगी।