सूचना और प्रसारण राज्य मंत्री डॉ. एल. मुरुगन ने कहा है कि सरकार आवश्यक बुनियादी ढांचा तैयार कर 20 लाख पेशेवरों को तैयार करने के प्रयास कर रही है। उन्होंने कहा कि रचनात्मक अर्थव्यवस्था में किए जा रहे सुधारों से फिल्म निर्माताओं को पायरेसी से बचाने में भी मदद मिल रही है। डॉ. मुरुगन आज जम्मू-कश्मीर अंतरराष्ट्रीय फिल्म महोत्सव के समापन समारोह को संबोधित कर रहे थे।
उन्होंने कहा कि यह महोत्सव प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के उस उद्देश्य को आगे बढ़ाता है, जिसमें उन्होंने वर्ष 2019 में फिल्म निर्माताओं से कश्मीर में फिल्मों की शूटिंग और निर्माण का आह्वान किया था। डॉ. मुरुगन ने महोत्सव के आयोजन के लिए जम्मू-कश्मीर सरकार को बधाई दी और कहा कि यह महोत्सव जम्मू-कश्मीर के युवाओं का है। उन्होंने कहा कि यहां के युवा साबित कर रहे हैं कि कल्पना की कोई सीमा नहीं होती। उन्होंने जम्मू-कश्मीर चयन वर्ग की सर्वश्रेष्ठ फिल्म ‘तसरुफदार-द जिन्स ऑफ कश्मीर’ को पुरस्कार प्रदान किया।
इस अवसर पर सूचना और प्रसारण मंत्रालय के सचिव चंचल कुमार भी मौजूद थे। उन्होंने जम्मू-कश्मीर सरकार को फिल्म निर्माताओं और सिनेमा से जुड़े पेशेवरों को एक मंच पर लाने के लिए बधाई दी। उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर ने भारतीय सिनेमा को कई यादगार फिल्में दी हैं और इस महोत्सव के आयोजन से क्षेत्र के इतिहास में एक नया अध्याय जुड़ा है।
श्री कुमार ने कहा कि मंत्रालय वेव्स समिट जैसे मंचों के जरिए युवा प्रतिभाओं के लिए नए अवसर उपलब्ध करा रहा है।
उन्होंने फिल्म बाजार का उल्लेख करते हुए कहा कि जम्मू-कश्मीर के फिल्म निर्माता खरीदारों और व्यापक फिल्म बाजार से जुड़कर लाभ उठा सकते हैं। उन्होंने मंत्रालय द्वारा विकसित किए जा रहे इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ क्रिएटिव टेक्नोलॉजी का भी उल्लेख किया और जम्मू-कश्मीर के युवाओं से फिल्म बाजार से जुड़ने तथा नए कौशल हासिल करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि मंत्रालय और जम्मू-कश्मीर सरकार मिलकर क्षेत्र के युवा फिल्म निर्माताओं और रचनाकारों के लिए और अधिक अवसर पैदा कर सकते हैं।