नेपाल आगामी संयुक्त राष्ट्र जलवायु परिवर्तन सम्मेलन यानी कॉप-31 में हिमालय के संरक्षण, जलवायु परिवर्तन से होने वाले नुकसान की भरपाई, जलवायु वित्त तक आसान पहुंच और जलवायु न्याय के मुद्दों को प्राथमिकता देगा। नेपाल के विदेश मंत्री शिसिर खनाल ने आज काठमांडू में राष्ट्रीय जलवायु शिखर सम्मेलन-2026 को संबोधित करते हुए कहा कि हिमालयी क्षेत्र में जलवायु परिवर्तन अब केवल नेपाल की चिंता नहीं, बल्कि पूरी दुनिया के लिए चुनौती बन गया है। उन्होंने कहा कि हिमालय का संरक्षण पानी की उपलब्धता, खाद्य उत्पादन, ऊर्जा और अर्थव्यवस्था की स्थिरता के लिए बेहद जरूरी है।
हाल में आई बाढ़ और भूस्खलन की घटनाओं का जिक्र करते हुए श्री खनाल ने कहा कि अगस्त में भोटेकोशी क्षेत्र में आई विनाशकारी आपदा सहित जलवायु संबंधी घटनाओं से जनजीवन, बुनियादी ढांचे, आजीविका और अर्थव्यवस्था को भारी नुकसान हुआ है। उन्होंने बताया कि अगस्त में आई आपदा से हुए नुकसान की भरपाई और प्रभावित क्षेत्रों को फिर से बसाने के लिए शुरुआती अनुमान के अनुसार लगभग चार अरब 70 करोड़ डॉलर की जरूरत होगी।
वहीं, कृषि, वन और पर्यावरण मंत्री गीता चौधरी ने कहा कि जलवायु परिवर्तन से होने वाले नुकसान से निपटने और प्रभावित लोगों की मदद के लिए ठोस कदम उठाए जाने चाहिए। कॉप-31 का आयोजन 9 से 20 नवंबर तक तुर्किये के अंताल्या में होगा।