सरकार ने देश के नागर विमानन क्षेत्र के लिए नए नियम अधिसूचित किए हैं, जो लगभग नौ दशक पुराने ‘विमान नियम, 1937’ की जगह लेंगे। ‘भारतीय वायुयान नियम, 2026’ अगले वर्ष एक जनवरी से लागू होंगे। ये नियम विमानन क्षेत्र के विभिन्न पहलुओं के लिए एक नियामक ढांचा प्रदान करते हैं, जिनमें विमान का पंजीकरण, निर्माण, सुरक्षा प्रमाणन, रखरखाव, उड़ान संचालन, कर्मियों का लाइसेंसिंग और हवाई अड्डा संचालन शामिल हैं।
नियमित हवाई सेवाएं संचालित करने वाली विमानन कंपनियों को परिचालन लागत सहित विभिन्न पहलुओं को ध्यान में रखते हुए हवाई किराया तय करना होगा और नागर विमानन महानिदेशालय-डीजीसीए को किराये का विवरण सौंपना होगा। इन प्रावधानों के अंतर्गत कोई असाधारण स्थिति पैदा होने पर केंद्र सरकार जनहित में हस्तक्षेप करते हुए लिखित निर्देश जारी कर सकती है। नए नियमों में हवाई किराया तय करने में पारदर्शिता बढ़ाने पर भी जोर दिया गया है। विमानन कंपनियों को अपनी आधिकारिक वेबसाइट और अन्य डिजिटल प्लेटफॉर्म पर किराये की जानकारी प्रकाशित करनी होगी। निर्धारित हवाई सेवाएं देने वाली कंपनियों के किराये पर डीजीसीए लगातार निगरानी रखेगा।
इन नियमों में विमानों के पंजीकरण और प्रमाणन से जुड़े प्रावधान भी शामिल हैं। इनमें भारत में विमान का पंजीकरण कराने और यह प्रमाणपत्र प्राप्त करने की प्रक्रिया तय की गई है कि विमान उड़ान के लिए सुरक्षित है या नहीं।