सितम्बर 15, 2026 7:34 अपराह्न | right to dignity

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दुष्कर्म पीड़िता को इच्छा के विरुद्ध मातृत्व के लिए मजबूर करना गरिमापूर्ण जीवन के अधिकार का उल्लंघन: दिल्ली हाईकोर्ट

दिल्ली उच्च न्यायालय ने कहा है कि दुष्कर्म पीड़िता को गर्भावस्था जारी रखने के लिए मजबूर करना और इच्छा विरुद्ध मातृत्व का दायित्व डालना उसके गरिमापूर्ण जीवन के अधिकार का गंभीर उल्लंघन है। न्यायालय ने 15 वर्षीय दुष्कर्म पीड़िता की याचिका को स्वीकार करते हुए ये टिप्पणियां कीं। याचिका में 30 सप्ताह से अधिक के गर्भ को समाप्त करने की मांग की गई है।

न्यायमूर्ति मधु जैन ने इसे दुर्भाग्यपूर्ण और दुखद मामला बताते हुए कहा कि गर्भावस्था की वैधानिक समयसीमा समाप्त होने को अलग-थलग करके नहीं देखा जा सकता। उन्होंने कहा कि महिला को मातृत्व संबंधी निर्णय लेने का पूरा अधिकार है।