अमरीका और ईरान के प्रतिनिधिमंडलों ने स्विट्जरलैंड के बर्गेनस्टॉक में उच्च-स्तरीय सीधी बातचीत शुरू कर दी है। इसका उद्देश्य दोनों देशों के बीच हुए कमजोर अंतरिम समझौते को मजबूत करना और पश्चिम एशिया के संघर्ष को खत्म करने की कोशिशों को आगे बढ़ाना है। अमरीकी प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व उपराष्ट्रपति जे डी वेंस कर रहे हैं, जबकि ईरानी प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बागेर गलीबाफ और विदेश मंत्री अब्बास अरागची कर रहे हैं। इस बातचीत में कतर और पाकिस्तान मध्यस्थता कर रहे हैं।
यह बैठक ऐसे समय में हो रही है जब ईरान ने कहा है कि लेबनान पर इस्राएल के लगातार हमलों के कारण होर्मुज जल डमरू मध्य को फिर से बंद कर दिया गया है। वहीं, अमरीकी सेना का कहना है कि यह जलमार्ग सभी जहाजों के लिए खुला है।
पिछले सप्ताह ईरान और अमरीका के बीच जारी 14-सूत्रीय समझौता ज्ञापन की पहली शर्त के अंतर्गत लेबनान सहित सभी मोर्चों पर संघर्षविराम की आवश्यकता है, जहां इस्राएल और ईरान समर्थित सशस्त्र गुट हिजबुल्लाह के बीच लड़ाई तेज हो गई है।
अमरीकी उपराष्ट्रपति ने ईरान के शीर्ष नेताओं से मुलाकात की और बातचीत मुख्य रूप से ईरान के परमाणु कार्यक्रम, क्षेत्रीय स्थिरता और महत्वपूर्ण होर्मुज जल डमरू मध्य को खुला रखने पर केंद्रित रही।
बैठक से पहले संवाददाताओं से बातचीत में अमरीकी उपराष्ट्रपति जे डी वेंस ने इसे दोनों देशों के बीच शांति वार्ता का एक ऐतिहासिक क्षण बताया। उन्होंने कहा कि इसका उद्देश्य अमरीका और ईरान के संबंधों को बदलने के लिए एक नई शुरुआत करना है।
अमरीकी प्रतिनिधिमंडल ने पाकिस्तानी मध्यस्थता की टीम के साथ बैठक की। इस प्रतिनिधिमंडल में विशेष दूत स्टीव विटकॉफ और राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रम्प के संबंधी जेरेड कुशनर भी शामिल हैं।
इस बीच, जैसे ही शांति वार्ता शुरू हुई, अमरीकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने आज ईरान पर फिर से हमला करने की धमकी दी। एक सोशल मीडिया पोस्ट में राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा कि अगर ईरान लेबनान में अपने प्रॉक्सी या हिज़्बुल्लाह को गड़बड़ी फैलाने से नहीं रोकता है, तो उसे इसी तरह के या उससे भी भीषण हमले का सामना करना पड़ सकता है।
दूसरी ओर, ईरान के मीडिया के अनुसार, राष्ट्रपति मसूद पेज़ेशकियन ने कहा है कि युद्ध खत्म करने के लिए अमरीका के साथ शुरुआती समझौते के अंतर्गत कतर के पास मौजूद छह अरब डॉलर की फ्रीज धनराशि ईरान को वापस कर दी जाएगी।