जुलाई 31, 2026 6:29 पूर्वाह्न

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संसद में लोक परीक्षा अनुचित साधन निवारण संशोधन विधेयक 2026 पारित

संसद ने लोक परीक्षा अनुचित साधन निवारण संशोधन विधेयक 2026 पारित कर दिया है। राज्‍यसभा ने इसे कल मंजूरी दी, लोकसभा से विधेयक बुधवार को पारित हुआ था। कार्मिक, लोक शिकायत और पेंशन राज्‍य मंत्री डॉ जितेन्‍द्र सिंह ने विधेयक पेश किया। सभापति सी. पी. राधाकृष्‍णनन ने विधेयक पर चर्चा के लिए सात घंटे का समय दिया।

विधेयक में सख्‍त दंड और जुर्माने सहित कई महत्‍वपूर्ण प्रावधान शामिल हैं। इनमें दस वर्ष तक की सज़ा, दस करोड़ रुपये तक का जुर्माना और दोषी व्‍यक्तियों की संपत्ति जब्‍त करना शामिल है। मामलों के शीघ्र निपटान के लिए राज्‍य सरकार और केन्‍द्रशासित प्रदेश प्रशासन विशेष त्‍वरित अदालतें स्‍थापित करेंगे। मामले की छानबीन पुलिस थाने में सूचना दर्ज होने की तिथि से दो महीने के अंदर पूरी करनी होगी। आरोप पत्र दाखिल होने के तीन महीने के अंदर सुनवाई पूरी हो जानी चाहिए। प्रधानमंत्री कार्यालय में राज्‍यमंत्री डॉ जितेन्‍द्र सिंह ने कहा कि देश के युवा विकसित भारत के लिए सबसे बड़ा निवेश है। उन्‍होंने कहा कि राष्‍ट्रीय शिक्षा नीति 2020 से पिछले दशक में महत्‍वपूर्ण बदलाव आया है।

चर्चा पर उत्‍तर के दौरान विपक्ष ने वॉकआउट किया। सदन में विधेयक पेश करते हुए डॉ जितेन्‍द्र सिंह ने कहा कि यह विधेयक विद्यार्थियों और युवाओं की हित रक्षा के लिए सरकार की सर्वोच्‍च प्राथमिकता की पुष्टि करता है। उन्‍होंने कहा कि पेपर लीक एक गंभीर समस्‍या है और पिछली सरकारों के दौरान भी देश के विभिन्‍न भागों से ऐसी घटनाओं की रिपोर्ट मिली। डॉ सिंह ने कहा कि कदाचार और परीक्षाओं में पेपर लीक को कतई बर्दाश्‍त न करना मोदी सरकार का संकल्प है। विद्यार्थियों के भविष्‍य से खिलवाड़ की अनुमति किसी को नहीं दी जा सकती।

चर्चा की शुरूआत करते हुए विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे ने कहा कि सरकार ने नए विधेयक में केवल दिखावे के लिए बदलाव किए हैं। प्रस्‍तावित संशोधन लोक परीक्षाओं में कदाचार रोकने में कारगर साबित नहीं होंगे। उन्‍होंने कहा कि सरकार ने पेपर लीक और परीक्षाओं में अनियमितताओं के खिलाफ विद्यार्थियों की आवाज उठने के बाद ही यह कदम उठाया है।

भारतीय जनता पार्टी के ब्रिज लाल ने चर्चा में भाग लेते हुए कहा कि सरकार ने 2024 के अधिनियम में प्रस्‍तावित प्रभावी सुधार अनुचित साधनों का इस्‍तेमाल रोकने के लिये किया है। उन्‍होंने कहा कि मामलों की जांच के लिए विशेष कार्यबल के गठन का भी प्रस्‍ताव है।

डीएमके पार्टी के तिरूचि शिवा ने नीट परीक्षा हटाए जाने की मांग की। उन्‍होंने कहा कि संशोधन विधेयक से शिक्षा प्रणाली में कोई बदलाव नहीं होगा।

जनता दल यूनाइटेड के संजय कुमार झा ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी के नेतृत्‍व में एनडीए सरकार ने मेडिकल शिक्षा के लिये कई महत्‍वपूर्ण पहल की है।

समाजवादी पार्टी के रामगोपाल यादव ने कहा कि केवल दंड बढ़ाने से अपराध का अंत नहीं होगा। उन्‍होंने भी नीट परीक्षा खत्‍म किए जाने की मांग करते हुए कहा कि राज्‍यों को मेडिकल प्रवेश परीक्षा संचालित कराने का अधिकार मिलना चाहिए।

विधेयक का समर्थन करते हुए राष्‍ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के प्रफुल्‍ल पटेल ने युवाओं को सही मार्ग दर्शन दिए जाने की अपील की। उन्होंने विरोध प्रदर्शन के लोकतांत्रिक अधिकार का समर्थन किया, लेकिन प्रदर्शन के दौरान इस्‍तेमाल की गई भाषा पर सवाल उठाए।

आम आदमी पार्टी के संजय सिंह ने त्‍वरित अदालतों में लंबित मामलों तथा स्‍कूलों में सुविधाओं के अभाव का मुद्दा उठाया।

भारतीय जनता पार्टी के सुधांशु त्रिवेदी ने कहा कि नीट परीक्षा सभी विद्यार्थियों को शामिल होने का मौका देती है और आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों को बेहतर प्रदर्शन करते देखना प्रेरक है। उन्‍होंने विपक्ष पर युवाओं को गुमराह करने का आरोप लगाया।

तृणमूल कांग्रेस की सागरिका घोष, ऑल इंडिया अन्‍ना डीमके पार्टी के थंबी दुरई, वाई एस आर सी पी के सुब्‍बा रेड्डी, बीजू जनता दल के संतृप्‍त मिश्रा तथा केन्‍द्रीय मंत्री और आर पी आई पार्टी के नेता राम दास अठालवे ने भी चर्चा में भाग लिया।

आज सदन की कार्रवाई 11 बजे फिर शुरू होगी।