केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारामन ने कहा है कि सार्वजनिक पूंजी को निजी निवेश के विकल्प के रूप में नहीं, बल्कि उसके लिए उत्प्रेरक के रूप में कार्य करना चाहिए। जयपुर में ब्रिक्स सदस्य देशों में निजी पूंजी जुटाने में न्यू डेवलपमेंट बैंक की भूमिका पर आयोजित एक सेमिनार में उन्होंने यह बात कही। श्रीमती सीतारामन ने कहा कि ब्रिक्स अर्थव्यवस्थाएं वैश्विक विकास के प्रमुख इंजनों में से हैं, लेकिन निजी पूंजी आकर्षित करना अभी भी एक बड़ी चुनौती है।
उन्होंने कहा कि पूंजी की उपलब्धता सुनिश्चित करने के साथ-साथ, निवेशकों का विश्वास बढ़ाना, स्थिरता बनाए रखना और एक पूर्वानुमानित दीर्घकालिक नीतिगत ढांचा प्रदान करना भी महत्वपूर्ण है।
वित्त मंत्री ने निवेश जोखिमों को कम करने, परियोजनाओं को अधिक वित्तीय रूप से व्यवहार्य बनाने और निवेशकों का विश्वास मजबूत करने में बहुपक्षीय विकास बैंकों की भूमिका का उल्लेख करते हुए कहा कि इससे बड़े पैमाने पर निजी पूंजी जुटाने में मदद मिलती है।
भारत के अनुभव का हवाला देते हुए श्रीमती सीतारामन ने कहा कि केंद्र सरकार ने निरंतर सार्वजनिक पूंजी व्यय और संरचनात्मक सुधारों के माध्यम से देश के बुनियादी ढांचे को मजबूत किया है।
इससे पहले आर्थिक मामलों की सचिव अनुराधा ठाकुर ने कहा कि वर्तमान आर्थिक परिवेश में निजी पूंजी की भागीदारी बढ़ाना आवश्यक है।
यह सेमिनार भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता 2026 के अंतर्गत जयपुर में आयोजित ब्रिक्स देशों के वित्त मंत्रियों और केंद्रीय बैंक गवर्नरों की बैठक के हिस्से के रूप में आयोजित किया जा रहा है। इसका उद्देश्य वैश्विक आर्थिक और वित्तीय मुद्दों पर सहयोग को मजबूत करना है।