बलूचिस्तान में बलूच कार्यकर्ताओं को उम्रकैद की सजा सुनाए जाने के विरोध में आज कई क्षेत्रों में चक्का जाम और पूर्ण बंदी की गई। यह विरोध प्रदर्शन पाकिस्तान की एक आतंकवाद रोधी अदालत द्वारा सोमवार को चार बलूच कार्यकर्ताओं को उम्रकैद की सजा सुनाए जाने के बाद हुआ। इन कार्यकर्ताओं में बलूच यकजहती कमेटी की नेता महरंग बलोच भी शामिल हैं।
अदालत ने फ्रंटियर कोर के एक अधिकारी की हत्या से जुड़े मामले में महरंग बलोच के अलावा बलूच स्टूडेंट्स ऑर्गेनाइजेशन के अध्यक्ष बालाच कादिर, केंद्रीय नेता अबू बकर कलांची और बीवाईसी नेता सिबगतुल्लाह शाह जी को भी उम्रकैद की सजा सुनाई है।
फैसले की आलोचना करते हुए बी.वाई.सी. ने कहा कि नेताओं के खिलाफ लगाए गए आरोप बेबुनियाद हैं और मुकदमे की प्रक्रिया में आवश्यक न्यायिक पारदर्शिता नहीं बरती गई। इस बीच, कई मानवाधिकार संगठनों ने भी इस फैसले की कडी आलोचना की है। एमनेस्टी इंटरनेशनल ने कहा कि यह फैसला दिखाता है कि पाकिस्तान के आतंकवाद विरोधी कानूनों का इस्तेमाल शांतिपूर्ण विरोध की आवाज दबाने के लिए किया जा रहा है। इंटरनेशनल ह्यूमन राइट्स फाउंडेशन ने भी फैसले की आलोचना करते हुए कहा कि यह न्याय नहीं, बल्कि असहमति की आवाजों और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं को डराने के लिए न्याय व्यवस्था के राजनीतिक इस्तेमाल का उदाहरण है।