11वीं भारत-मिस्र संयुक्त रक्षा समिति की बैठक कल काहिरा में संपन्न हुई। इस दौरान द्विपक्षीय रक्षा सहयोग बढ़ाने की दिशा में सार्थक चर्चा हुई। रक्षा मंत्रालय ने बताया कि चर्चा के दौरान, दोनों पक्षों ने पिछली बैठक के बाद से हुई प्रगति की व्यापक समीक्षा की और रक्षा सहयोग के लिए एक दूरदर्शी रूपरेखा तैयार की।
मंत्रालय के अनुसार 2026-27 के लिए द्विपक्षीय रक्षा सहयोग योजना पर सहमति हुई है। इसमें संरचित सैन्य समन्वय तंत्रों का विस्तार, संयुक्त प्रशिक्षण आदान-प्रदान को मजबूत करना, समुद्री सुरक्षा सहयोग बढ़ाना, सैन्य अभ्यासों के दायरे और जटिलता को बढ़ाना तथा रक्षा उत्पादन और प्रौद्योगिकी में सहयोग को बढ़ावा देना शामिल है। मंत्रालय ने कहा कि दोनों पक्ष रक्षा उद्योग सहयोग योजना विकसित करने के लिए मिलकर काम करने पर भी सहमत हुए। रक्षा उद्योग सहयोग भारत-मिस्र रक्षा संबंधों का एक प्रमुख स्तंभ बनकर उभर रहा है।
बैठक के दौरान दोनों देशों के नौसेना स्टाफ वार्ता का उद्घाटन भी हुआ। हिंद महासागर क्षेत्र में नौवहन की स्वतंत्रता को बढ़ावा देने में भारतीय नौसेना की भूमिका को प्रस्तुत किया गया और समुद्री सुरक्षा को बढ़ावा देने में भारत के सूचना संलयन केंद्र की महत्वपूर्ण भूमिका पर प्रकाश डाला गया। भारतीय प्रतिनिधिमंडल ने मिस्र की वायु सेना के कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल अमर अब्देल रहमान साकर से भी मुलाकात की। प्रतिनिधिमंडल ने दोनों देशों की वायु सेनाओं के बीच घनिष्ठ सहयोग के लिए मिस्र की वायु सेना के कमांडर को धन्यवाद दिया।