उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन ने कहा कि संविधान लोकतांत्रिक स्थिरता और राष्ट्रीय एकता का आधार बना हुआ है और इसमें संशोधन करने की संसद की शक्ति देश को बदलते समय की ज़रूरतों को पूरा करने में सक्षम बनाती है। उपराष्ट्रपति ने नई दिल्ली में ‘द वॉयस ऑफ़ जस्टिस: जस्टिस गवई स्पीक्स’ नामक पुस्तक का विमोचन करते हुए यह बात कही। यह पुस्तक सर्वोच्च न्यायालय के पूर्व मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति भूषण रामकृष्ण गवई के भाषणों, व्याख्यानों और विचारों का संग्रह है।
उपराष्ट्रपति ने इस पुस्तक को एक महत्वपूर्ण संवैधानिक दस्तावेज़ बताया, जो अनुभव, संवैधानिक अनुशासन और सार्वजनिक ज़िम्मेदारी से आकार लेने वाली न्यायिक सोच को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि यह पुस्तक संविधानवाद, कानून के शासन, सामाजिक न्याय और लोकतांत्रिक शासन के बारे में बहुमूल्य जानकारी देती है और देश में संवैधानिक चर्चा तथा कानूनी ज्ञान को मज़बूत करेगी। श्री राधाकृष्णन ने कहा कि यह पुस्तक संविधान को सही ढंग से एक जीवंत और विकसित होते दस्तावेज़ के रूप में प्रस्तुत करती है।
इस अवसर पर सर्वोच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत, पूर्व मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति बी आर गवई, न्यायाधीश विक्रम नाथ, राष्ट्रमंडल कानूनी शिक्षा संघ के अध्यक्ष और संपादक एस. शिवकुमार और अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।