दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने आज नजफगढ़ के गोयला डेयरी में 16 करोड़ रुपये की लागत से बने बायोगैस संयंत्र का उद्घाटन किया। इस संयंत्र में प्रतिदिन 200 मीट्रिक टन गोबर का प्रसंस्करण करने की क्षमता है।
संयंत्र से प्रतिदिन लगभग 14 हजार घन मीटर कच्ची बायोगैस और साढे 5 टन से अधिक शुद्ध कंप्रेस्ड बायोगैस के उत्पादन का अनुमान है। गैस की आपूर्ति इंद्रप्रस्थ गैस लिमिटेड को की जाएगी, वहीं, बची हुई स्लरी का उपयोग जैविक खाद के रूप में होगा। दिल्ली नगर निगम द्वारा स्थापित इस संयंत्र से गोबर को उपयोगी संसाधन में बदलकर स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन, कृषि लाभ और यमुना प्रदूषण की रोकथाम में मदद मिलेगी। साथ ही, क्षेत्र में स्वच्छता बेहतर बनाने और पशुपालकों की आय बढ़ाने में मदद मिलेगी।
अपने संबोधन में श्रीमती गुप्ता ने कहा कि यमुना को स्वच्छ बनाने के लिए प्रदूषण को उसके स्रोत पर रोकना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि केवल नदी की सफाई करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उन कारणों पर भी प्रभावी कार्रवाई करनी होगी, जिनसे प्रदूषक नदी तक पहुंचते हैं। मुख्यमंत्री ने बताया कि दिल्ली की डेयरी कॉलोनियों में नालियों के निर्माण और जल निकासी व्यवस्था में सुधार के लिए 50 करोड़ रुपये का कोष उपलब्ध कराया गया है।
इस अवसर पर, दिल्ली सरकार में मंत्री आशीष सूद ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में पहले गोबर के उपलों का इस्तेमाल ईंधन के रूप में किया जाता था। श्री सूद ने कहा कि पिछली सरकारों ने पॉश कॉलोनियों से डेयरियों को डेयरी फार्मों में तो स्थानांतरित किया, लेकिन गोबर के वैज्ञानिक निस्तारण और बुनियादी सुविधाओं में सुधार के लिए पर्याप्त काम नहीं किया।
दिल्ली सरकार के अनुसार, पिछले 18 महीनों में तीन बायोगैस संयंत्र शुरू किए गए हैं और छह अन्य स्थापित करने की योजना है।