रोमानिया के बुखारेस्ट यूनिवर्सिटी ऑफ इकोनॉमिक स्टडीज ने आज राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को उनकी विशिष्ट सार्वजनिक सेवा, शिक्षा और सामाजिक समावेश के प्रति प्रतिबद्धता और भारत-रोमानिया संबंधों को मजबूत करने में उनके योगदान के लिए डॉक्टरेट की मानद उपाधि से सम्मानित किया। राष्ट्रपति ने सम्मान स्वीकार करते हुए, इसे भारत की 14 लाख जनता को समर्पित किया और कहा कि यह दोनों देशों के लोगों के बीच अटूट मित्रता को दर्शाता है।
राष्ट्रपति मुर्मु ने शिक्षा को अपने जीवन की सबसे परिवर्तनकारी शक्ति बताया। अपने गांव की पहली लड़की के रूप में कॉलेज जाने से लेकर भारत की राष्ट्रपति बनने तक के अपने सफर को याद करते हुए उन्होंने कहा कि शिक्षा सबसे बड़ा समानता लाने वाला कारक और एक न्यायपूर्ण और समावेशी समाज का सबसे मजबूत आधार है। उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता और तीव्र तकनीकी परिवर्तन के इस युग में, विश्वविद्यालयों की यह जिम्मेदारी है कि वे यह सुनिश्चित करें कि ज्ञान का मार्गदर्शन विवेक, नैतिकता और करुणा द्वारा किया जाए।
भारत और रोमानिया के बीच गहरे सांस्कृतिक और सभ्यतागत संबंधों की चर्चा करते हए, राष्ट्रपति मुर्मू ने एक शताब्दी पहले रवींद्रनाथ टैगोर की बुखारेस्ट यात्रा और रोमानियाई कवि मिहाई एमिनस्कु और विद्वान मिर्सेआ एलियाडे पर भारतीय दर्शन के प्रभाव को याद किया। उन्होंने संयुक्त अनुसंधान, संकाय और छात्र आदान-प्रदान के माध्यम से अधिक अकादमिक सहयोग को प्रोत्साहित किया। उन्होंने रोमानिया के लिए आईटीईसी प्रशिक्षण सीटों की संख्या दोगुनी करने की घोषणा की जिसमें कृत्रिम बुद्धिमत्ता जैसे उभरते क्षेत्र भी शामिल हैं। राष्ट्रपति ने उनसे अपने ज्ञान और मूल्यों का उपयोग संस्कृतियों के बीच सेतु बनाने और अधिक शांतिपूर्ण तथा समृद्ध विश्व में योगदान देने का आग्रह किया।
बुखारेस्ट यूनिवर्सिटी ऑफ इकोनॉमिक स्टडीज के सीनेट अध्यक्ष प्रोफेसर घेओर्गे हर्डुज़ेउ ने कहा कि राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को डॉक्टरेट की मानद उपाधि प्रदान करना उनके असाधारण करियर के प्रति सम्मान और उस दृढ़ विश्वास की पुष्टि है जो एक शताब्दी से अधिक समय से विश्वविद्यालय की पहचान रहा है। राष्ट्रपति मुर्मु ने गांव के संग्रहालय का दौरा भी किया और ‘एक पेड़ मां के नाम’ पहल के तहत वहां एक पौधा लगाया।