सर्वोच्च न्यायालय ने कहा है कि 1978 के ऐतिहासिक बेंगलुरु जलापूर्ति फैसले में ‘उद्योग’ की दी गई व्यापक परिभाषा ही औद्योगिक विवाद अधिनियम, 1947 के अन्तर्गत सही व्याख्या है। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता में नौ न्यायाधीशों की संविधान पीठ ने बहुमत से यह फैसला सुनाया। पीठ ने कहा कि यह व्यापक परिभाषा उन संस्थानों पर लागू होगी, जहां नियोक्ता और कर्मचारी के बीच संबंध मौजूद हैं।
सर्वोच्च न्यायालय ने स्पष्ट किया कि भविष्य के विवादों पर औद्योगिक संबंध संहिता, 2020 लागू होगी। न्यायालय ने कहा कि नई संहिता की व्याख्या उसके अपने प्रावधानों और संदर्भ के आधार पर की जाएगी और बेंगलुरु जलापूर्ति मामले का फैसला इस व्याख्या के आधार पर नहीं होगा।
21 फरवरी 1978 को सात न्यायाधीशों की पीठ ने बेंगलुरु जलापूर्ति और सीवरेज बोर्ड मामले में ‘उद्योग’ की परिभाषा का दायरा बढ़ाया था। इस फैसले के अन्तर्गत अस्पतालों, शिक्षण संस्थानों, क्लबों और सरकारी कल्याण विभागों में काम करने वाले लाखों कर्मचारियों को तत्कालीन औद्योगिक विवाद अधिनियम, 1947 के संरक्षण के दायरे में लाया गया था।