अक्टूबर 9, 2026 8:59 पूर्वाह्न

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कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने रांची स्थित भारतीय कृषि जैव प्रौद्योगिकी संस्थान में नई सुविधाओं का उद्घाटन किया

केंद्रीय कृषि और किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने रांची के गढ़खटंगा स्थित भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद्-आईसीएआर के भारतीय कृषि जैव प्रौद्योगिकी संस्थान में कई नई सुविधाओं का उद्घाटन किया। इनमें प्रशासनिक-सह-विद्यालय भवन, बिरसा मुंडा बहुउद्देशीय हॉल, जयपाल सिंह मुंडा खेल परिसर और अगली पीढ़ी के जैव प्रजनन सुविधा केन्‍द्र शामिल हैं। उन्होंने संस्थान में एक नए अतिथि गृह की आधारशिला भी रखी। इस परियोजना पर 119 करोड़ रुपये की लागत आएगी। 
 
श्री चौहान ने अपने संबोधन में झारखंड में वैज्ञानिक खेती, उन्नत बीजों, एकीकृत कृषि, संतुलित पोषक तत्व प्रबंधन और स्थानीय परिस्थितियों के अनुकूल कृषि तकनीकों के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने किसानों तक कृषि अनुसंधान और नई तकनीकों को पहुंचाने के संस्थान के प्रयासों की सराहना की। साथ ही, किसानों को जागरूक करने और खेतों तक कृषि संबंधी जानकारी पहुंचाने के निरंतर प्रयासों की आवश्यकता बताई।
 
श्री चौहान ने झारखंड की समृद्ध प्राकृतिक और पारंपरिक विरासत का उल्लेख करते हुए कहा कि यह संस्थान कृषि अनुसंधान, नवाचार और आत्मनिर्भरता का महत्वपूर्ण केंद्र है। उन्होंने कहा कि पारंपरिक ज्ञान का अपना महत्व है, लेकिन कृषि की मौजूदा चुनौतियों से निपटने के लिए किसानों को स्थानीय संसाधनों और जलवायु के अनुकूल वैज्ञानिक तथा तकनीक आधारित खेती अपनानी होगी। उन्होंने किसानों को समय पर उन्नत बीज उपलब्ध कराने और अनुसंधान संस्थानों की तकनीकों को खेतों तक पहुंचाने पर भी जोर दिया।
 
केंद्रीय मंत्री ने सब्जियों, अनाज और पशुपालन को शामिल करते हुए एकीकृत खेती तथा संतुलित उर्वरकों के उचित इस्तेमाल की आवश्यकता बताई। उन्होंने किसान कल्याण योजनाओं को प्रभावी ढंग से लागू करने और उनका लाभ हर गांव तक पहुंचाने का भी आह्वान किया।
 
इससे पहले, आईसीएआर ने कल अनुसूचित जाति उप-योजना और जनजातीय उप-योजना के तहत रबी पूर्व किसान गोष्ठी-सह-कृषि सामग्री वितरण कार्यक्रम आयोजित किया। इसमें रांची, खूंटी, गुमला और रामगढ़ जिलों के लगभग डेढ़ हजार किसानों ने भाग लिया। कार्यक्रम का उद्देश्य किसानों, वैज्ञानिकों और नीति निर्माताओं के बीच सीधा संवाद बढ़ाना तथा वैज्ञानिक और टिकाऊ कृषि पद्धतियों को अपनाने के लिए किसानों को प्रोत्साहित करना था।