उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन ने सामाजिक समानता और समाज सेवा का उपदेश देने वाले संत बसवेश्वर के दर्शन का अनुकरण करने का आह्वान किया है। उपराष्ट्रपति आज बीदर के भालकी स्थित श्री चन्नाबसवाश्रम में हीरेमठ संस्थान के डॉ. बसवलिंग पट्टादेवरु महास्वामीजी के अमृत महोत्सव का उद्घाटन करने के बाद बोल रहे थे। उन्होंने समाज से संत बसवेश्वर के सार्वभौमिक दृष्टिकोण को आगे बढ़ाने का संकल्प लेने का आग्रह किया, ताकि करुणा और धर्म पर आधारित समानता से युक्त समाज का निर्माण हो सके।
उपराष्ट्रपति ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा परिकल्पित ‘विकास भी विरासत भी’ नीति के बारे में भी बात की। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री ने भारत तकनीकी रूप से उन्नत, आर्थिक रूप से मजबूत और वैश्विक स्तर पर प्रभावशाली होने के साथ-साथ अपनी सभ्यतागत मूल्यों में गहराई से जुड़ा रह सकता है। इससे हमारे प्राचीन मंदिरों, हमारी प्राचीन भाषा संस्कृत और योग के प्रति गौरव की भावना पैदा हुई है।
उपराष्ट्रपति ने महिला सशक्तिकरण के महत्व पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि नारी शक्ति पूरे समाज को सशक्त बनाती है। उपराष्ट्रपति ने कहा कि कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और उनके बीच विचारों में थोड़ी भिन्नता है। श्री राधाकृष्णन ने कहा कि कार्यक्रम में मंच पर उपस्थित श्री खरगे काले और गोरे में तथा आतंकवादी और आतंकवादियों के लिए आतंक के बीच कोई भेद नहीं करते।