अगस्त 22, 2026 9:19 अपराह्न

printer

प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी ने नई दिल्ली में भारतीय जनता पार्टी के नए पदाधिकारियों से बातचीत की

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज शाम नई दिल्ली में भाजपा मुख्यालय में पार्टी के नवनियुक्त राष्ट्रीय पदाधिकारियों के साथ वार्ता की। पार्टी अध्यक्ष नितिन नबीन के अलावा बैठक में पार्टी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष और महासचिव सहित अन्य लोग भी उपस्थित थे। प्रधानमंत्री ने कहा कि संगठनात्मक बैठकें नए विचारों और दृष्टिकोणों पर आधारित होती हैं। इनका उद्देश्य पार्टी को मजबूत करना और लोगों के साथ इसके जुड़ाव को बढाना है।

इससे पहले दिन में पार्टी अध्यक्ष नितिन नबीन ने भी पार्टी के नवनियुक्त राष्ट्रीय पदाधिकारियों के साथ बैठक की। श्री नबीन ने कहा कि भाजपा टीम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के भारत को विकसित राष्ट्र बनाने के संकल्प को साकार करने के लिए पार्टी के आधार को और व्यापक बनाने के लिए पूर्ण समर्पण और निष्ठा के साथ काम करने के लिए प्रतिबद्ध है।

उन्‍होंने बताया कि बैठक के दौरान भाजपा ने वंदे मातरम् की ऐतिहासिक विरासत के सम्मान और संरक्षण के संबंध में एक प्रस्ताव पारित किया। इसमें पार्टी ने कांग्रेस कार्य समिति द्वारा 19 अगस्‍त को कांग्रेस कार्यक्रमों में वंदे मातरम के गायन को केवल पहले दो पैरा तक सीमित करने वाले 1937 के प्रस्ताव को पुनः लागू किए जाने के निर्णय की कड़ी निंदा की। भाजपा ने कांग्रेस को याद दिलाया कि उसकी कार्य समिति का कोई भी प्रस्ताव देश के संवैधानिक संस्थानों या कानूनों का उल्लंघन नहीं कर सकता।

पार्टी ने राष्ट्रीय गीत के रूप में संपूर्ण वंदे मातरम् के सम्मान, गरिमा, विरासत और राष्ट्रीय महत्व को बनाए रखने का संकल्प लिया है। उन्होंने कहा कि भाजपा सांप्रदायिक दबाव, राजनीतिक तुष्टीकरण या संकीर्ण वोट बैंक के स्वार्थों के कारण राष्ट्रीय गीत को दबाने के हर प्रयास को अस्वीकार करने के लिए दृढ़ संकल्पित है। श्री नबीन ने कहा कि पार्टी भाजपा कार्यकर्ताओं के माध्यम से एक राष्ट्रव्यापी अभियान चलाएगी । इसमें वंदे मातरम् के इतिहास, राष्ट्रीय महत्व और गौरवशाली विरासत को देश के कोने-कोने तक पहुंचाया जाएगा। उन्होंने कहा कि भाजपा वंदे मातरम् को राष्ट्रीय गीत, भारत माता के प्रति श्रद्धा की अभिव्यक्ति, स्वतंत्रता संग्राम का मंत्र और राष्ट्रीय चेतना का अमर प्रतीक मानती है। भाजपा अध्‍यक्ष ने कहा कि वंदे मातरम की विरासत को समकालीन वोट बैंक की राजनीति के हिसाब से नहीं आंका जा सकता।