सितम्बर 3, 2026 8:25 पूर्वाह्न | PM Modi

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प्रधानमंत्री मोदी ने जल-संरक्षण से जुड़ी तकनीक अपनाने और सर्वोत्तम वैश्विक प्रथाओं से सीखने का आह्वान किया

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शहरीकरण से उत्पन्न चुनौतियों, बढ़ती आबादी और भविष्य में पानी की जरूरतों के प्रति शहरी स्थानीय निकायों को संवेदनशील बनाने का आह्वान किया है। उन्होंने शहरी स्थानीय निकायों के लिए भी इसी तरह के चिंतन शिविर आयोजित करने का सुझाव दिया।

    प्रधानमंत्री ने कल जल शक्ति मंत्रालय द्वारा आयोजित दो दिन के राष्ट्रीय विभागीय जल सम्मेलन के समापन सत्र की अध्यक्षता की। उन्होंने जल संरक्षण तकनीकों को अधिक से अधिक अपनाने पर बल दिया। श्री मोदी ने भारतीय विनिर्माणकर्ताओं और हितधारकों को प्रभावी समाधान विकसित करने तथा उन्हें बड़े स्तर पर लागू करने में सक्षम बनाने के लिए वैश्विक सर्वोत्तम प्रथाओं की जानकारी देने वाली प्रदर्शनियों और कार्यशालाओं के आयोजन का भी सुझाव दिया।

    प्रधानमंत्री ने सम्मेलन में दो दिनों तक हुई गहन चर्चा की सराहना की। उन्होंने कहा कि सम्मेलन से विमर्श से प्राप्त कार्रवाई योग्य और समयबद्ध कार्य-बिंदुओं को निरंतर समीक्षा और सीखने की प्रक्रिया द्वारा आगे बढ़ाया जाना चाहिए। उन्होंने सुझाव दिया कि यह सम्मेलन एक बार की कवायद नहीं रहनी चाहिए ,बल्कि निरंतर समीक्षा और अनुवर्ती कार्रवाई होनी चाहिए।

    श्री मोदी ने जन भागीदारी पर जोर देते हुए लोगों में व्यापक जागरूकता उत्पन्न करने के लिए जल उत्सव आयोजन को बढ़ावा देने का सुझाव दिया। प्रधानमंत्री ने जल माध्यमों से गाद निकालने की प्रक्रिया नियमित तौर पर अपनाने और इसके लिए स्पष्ट मानदंड तथा मानक संचालन प्रक्रियाएं विकसित करने का आह्वान किया।

    प्रधानमंत्री ने बांध सुरक्षा पर हर मानसून से पहले व्यापक तैयारी, निर्धारित सावधानियों का पालन और स्कूली विद्यार्थियों में जागरूकता बढ़ाने पर बल दिया। उन्होंने इसके लिए शैक्षणिक पाठ्यक्रम में उपयुक्त विषयों को शामिल करने का सुझाव दिया।

    प्रधानमंत्री ने विश्वविद्यालयों और उच्च शिक्षण संस्थानों में जल प्रबंधन और प्रशासन से जुड़ी जानकारी तथा क्षमता को मजबूत करने की आवश्यकता पर भी जोर दिया। उन्होंने जनप्रतिनिधियों, अधिकारियों और किसानों के लिए राज्यों के बीच व्यवस्थित अध्ययन दौरों का सुझाव दिया, जिससे सफल उपायों से व्यावहारिक सीख लेकर उन्हें अन्य क्षेत्रों में भी लागू किया जा सके।

    श्री मोदी ने मजबूत जल डेटा प्रबंधन व्यवस्था विकसित करने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि जल क्षेत्र से जुड़े आंकड़ों को एक जगह एकत्र कर व्यवस्थित रूप से प्रबंधित, विश्लेषित और प्रभावी ढंग से इस्तेमाल किया जाना चाहिए। उन्होंने समान प्रारूप द्वारा आंकड़े संग्रह और विश्लेषण के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता के उपयोग का सुझाव दिया।

    प्रधानमंत्री ने जल संकट से निपटने के लिए पहले से तैयारी और एकीकृत योजना बनाने पर भी जोर दिया। उन्होंने कृषि और औद्योगिक जरूरतों के लिए उपचारित जल के उचित उपयोग का सुझाव दिया।