ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य से ‘शत्रु’ देशों के सैन्य उपकरणों के आवागमन पर रोक लगाने की घोषणा की है। ईरान ने कहा, वह रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण होर्मुज जल डमरू मध्य से सैन्य उपकरणों से लदे शत्रु पोतों को गुजरने की अनुमति नहीं देगा। यह जल डमरू मध्य विश्व ऊर्जा व्यापार के लिए एक प्रमुख समुद्री मार्ग है।
ईरान के प्रथम उपराष्ट्रपति मोहम्मद रजा आरेफ़ ने कहा कि ईरान ने पहले इस जलमार्ग पर अपनी पूर्ण संप्रभुता का प्रयोग करने में संयम बरता है और सैन्य उपकरणों से लदे पोतों को इस जलमार्ग से गुजरने की अनुमति दी है जो ईरान के विरूद्ध ही प्रयोग किये जाते रहे हैं। उन्होंने कहा कि अब यह नीति बदल जाएगी।
कल, ईरान की संसद की राष्ट्रीय सुरक्षा समिति के प्रमुख इब्राहिम अजीजी ने घोषणा की कि ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य में विशेष मार्ग से समुद्री यातायात को विनियमित करने के लिए एक तंत्र विकसित किया है। श्री अजीजी ने कहा कि यह तंत्र केवल वाणिज्यिक जहाजों और ईरान के साथ सहयोग करने वाले देशों को ही अनुमति देगा। उन्होंने कहा कि अमरीका की कथित स्वतंत्रता परियोजना से जुड़े ऑपरेटरों को प्रस्तावित मार्ग प्रयोग करने की अनुमति नहीं होगी।
इस बीच, अमरीका के राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रम्प की चीन की तीन दिन की राजकीय यात्रा के दौरान, अमरीका और चीन ने ईरान को परमाणु हथियार हासिल नहीं करने और होर्मुज जल डमरू मध्य से आवागमन खुला रखने पर सहमति व्यक्त की।
होर्मुज जल डमरू मध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में से एक है, जहां से वैश्विक तेल आपूर्ति का लगभग पांचवां हिस्सा गुजरता है। यह संकरा जलमार्ग फारस की खाड़ी को अंतरराष्ट्रीय बाजारों से जोड़ता है।
ईरान, इस्राएल और अमरीका के बीच सैन्य संघर्ष के बाद क्षेत्रीय तनाव तेजी से बढ़ गया, जिससे ऊर्जा आपूर्ति, वाणिज्यिक पोत परिवहन सुरक्षा और पश्चिम एशिया में व्यापक स्थिरता को लेकर चिंताएं बढ़ गईं।