भारतीय नौसेना ने आज मुंबई स्थित नौसैनिक शिपयार्ड में कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड द्वारा निर्मित तीसरी पनडुब्बी-रोधी वॉरफेयर शैलो वाटर क्राफ्ट, आईएनएस मांगरोल को नौसेना में शामिल किया। स्वदेशी तकनीक से निर्मित इस युद्धपोत के शामिल होने से तटीय और उथले समुद्री क्षेत्रों में पनडुब्बियों का पता लगाने और उनसे निपटने की नौसेना की क्षमता मजबूत होगी।
नौसेना के पश्चिमी कमान के फ्लैग ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ वाइस एडमिरल संजय वात्सयान की अध्यक्षता में कमीशनिंग समारोह आयोजित किया गया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि 80% से अधिक स्वदेशी सामग्री से निर्मित यह युद्धपोत भारत की इंजीनियरिंग क्षमता, तकनीकी प्रगति और राष्ट्रीय संकल्प को दर्शाता है। उन्होंने बताया कि वर्ष 2026 में अब तक दस युद्धपोत नौसेना में शामिल किए जा चुके हैं। उन्होंने यह भी कहा कि वर्ष 2034 तक नौसेना के लगभग 60 प्रतिशत प्लेटफॉर्म की औसत आयु दस वर्ष से कम होने की उम्मीद है।
गुजरात के जूनागढ़ जिले में स्थित प्रमुख मछली पकड़ने वाले बंदरगाह ‘मांगरोल’ के नाम पर इस जहाज का नाम रखा गया है। यह एक सुरंग रोधी जहाज था।
आईएनएस मांगरोल को तटीय और उथले समुद्री क्षेत्रों में पानी के भीतर मौजूद खतरों का पता लगाने और उनसे निपटने के लिए तैयार किया गया है। आधुनिक हथियारों और सेंसरों से लैस है, जिसमें अभय हल-माउंटेड सोनार, हल्के वजन वाले टॉरपीडो, एक स्वदेशी पंडुब्बी-रोधी रॉकेट लॉन्चर और मारीच एडवांस्ड टॉरपीडो डिकॉय सिस्टम शामिल हैं।