अगस्त 22, 2026 2:13 अपराह्न

printer

भारत ने लाइसेंस राज के दौरान उत्पादन को दंडित करने के दृष्टिकोण में किया मौलिक परिवर्तन: प्रधानमंत्री मोदी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा है कि भारत ने लाइसेंस राज के दौरान उत्पादन को दंडित करने के अपने दृष्टिकोण में मौलिक परिवर्तन किया है। अब उसके स्‍‍थान पर सरकारी प्रोडक्‍शन-लिंक्ड इंसेंटिव (पीएलआई) योजना के माध्यम से इसे पुरस्कृत किया जाता है। इकोनॉमिक टाइम्स वर्ल्ड लीडर्स फोरम-2026 को संबोधित करते हुए श्री मोदी ने पिछली सरकारों की उस सोच की आलोचना की, जिसमें जानबूझकर चीजों की कमी बनाए रखी जाती थी, ताकि लोगों को सरकार पर निर्भर रखा जा सके। उन्होंने कहा कि इस नीति से रोजगार के अवसर पैदा करने की प्रक्रिया पर गंभीर असर पड़ा। शासन की सोच में में परिवर्तनकारी बदलाव पर प्रकाश डालते हुए, प्रधानमंत्री ने नकारात्‍मक प्रोडक्‍शन-लिंक्ड इंसेंटिव मॉडल की तुलना वर्तमान पीएलआई योजना से की। उन्‍होंने कहा कि इस सोच में सुधार से आर्थिक परिणामों  का मौलिक रूप से बदल गया है। उन्होंने पीएलआई योजना की सफलता  का उल्‍लेख करते हुए कहा कि इससे 2.5 लाख करोड़ रुपये का वास्तविक निवेश हुआ है। वहीं 22 लाख करोड़ रुपये के उत्पादन और बिक्री को बढ़ावा मिला है, 15 लाख करोड़ रुपये का निर्यात हुआ है और 14 लाख से अधिक रोजगार सृजित हुए हैं।
 
दुनिया में आर्थिक विकास, संसाधनों को औजार के रूप में प्रयोग करने और बढ़ते अविश्वास को लेकर चिंता के बीच प्रधानमंत्री ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय भारत को विकास और उम्मीद की एक नई किरण के रूप में देख रहा है। उन्होंने कहा कि भारत ने 25 करोड़ लोगों को गरीबी से बाहर निकाला है और वह दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था बना हुआ है। प्रधानमंत्री ने कहा कि सरकार सप्तधारा पर विशेष ध्यान दे रही है। इसमें विनिर्माण, प्रौद्योगिकी और हरित अर्थव्यवस्था सहित सात प्रमुख क्षेत्र शामिल हैं। इनका उल्लेख उन्होंने स्वतंत्रता दिवस के संबोधन में किया था। प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत आज नीति के स्तर पर अगली पीढ़ी के सुधार, प्रशासन में परिवर्तन और जीवन को आसान बनाने के लिए बदलाव कर रहा है।