भारत ने कहा है कि वैश्विक चुनौतियों के लिए सैन्य समाधान नहीं बल्कि कूटनीति को मौका दिया जाना चाहिए। अमरीका के अटलांटा में कल रात जी-20 विदेश मंत्रियों की बैठक के पहले पूर्ण सत्र में विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने यह बात कही। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय समुद्री कानून का जिक्र करते हुए, समुद्री आवाजाही की स्वतंत्रता बनाए रखने और नागरिक जहाजों तथा नाविकों पर होने वाले हमलों को रोकने की आवश्यकता पर बल दिया।
रूस-यूक्रेन युद्ध और पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव सहित दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में चल रहे संघर्षों के बीच उनका यह बयान आया है। डॉ. जयशंकर ने कहा कि नागरिक जहाजों और नाविकों पर होने वाले हमलों का सर्वाधिक असर अल्प विकसित और विकासशील देशों पर पड़ रहा है। उन्होंने बताया कि इस तरह के हमलों से ईंधन, भोजन और उर्वरक जैसी आवश्यक वस्तुओं की उपलब्धता पर खतरा पैदा हो गया है और उनकी कीमतें भी बढ़ रही हैं। इस साल फरवरी में संघर्ष शुरू होने के बाद से पश्चिम एशिया में 14 नाविकों सहित लगभग 22 भारतीयों की जान जा चुकी है।
विदेश मंत्री जयशंकर ने बैठक से पहले कई देशों के विदेश मंत्रियों के साथ वार्ता की। जी-20 बैठक के दौरान, डॉ. जयशंकर क्वाड विदेश मंत्रियों की बैठक में भी हिस्सा लेंगे। इस समूह में भारत, जापान, ऑस्ट्रेलिया और अमरीका शामिल हैं। अमरीका 14 और 15 दिसंबर को मियामी में जी-20 नेताओं के शिखर सम्मेलन की मेजबानी करेगा। अमरीका के बाद डॉ. जयशंकर एंटीगुआ और बारबुडा के सेंट जॉन्स जाएंगे। वहां वे 1 से 4 नवंबर तक आयोजित होने वाली राष्ट्रमंडल शासनाध्यक्षों की बैठक में भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व करेंगे।