सितम्बर 29, 2026 9:53 अपराह्न

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रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भारतीय नौसेना कमांडर्स सम्मेलन को किया संबोधित

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा है कि बदलती प्रौद्योगिकी, अनिश्चित परिस्थितियों और भौगोलिक चुनौतियों के बीच भारत को अपनी तैयारियों में जमीनी स्‍तर पर रणनीतिक सोच और आकस्मिक परिस्थितियों से निपटने की योजना को महत्वपूर्ण स्थान देना होगा। नई दिल्ली में आज भारतीय नौसेना कमांडर्स सम्मेलन को संबोधित करते हुए श्री सिंह ने कहा कि वर्ष 2047 तक विकसित भारत के संकल्प को साकार करने में भारतीय नौसेना रणनीतिक आधार के रूप में काम कर रही है। उन्होंने कहा कि भारत का लक्ष्य स्पष्ट है कि संकट आने से पहले ही हमारी तैयारियां इतनी मजबूत होनी चाहिए कि देश उससे निपटने के लिए तैयार रहे।

रक्षा मंत्री ने कहा कि जारी ‘ऑपरेशन ऊर्जा सुरक्षा’ ने एक बार फिर देश की ऊर्जा आपूर्ति लाइनों और राष्ट्रीय हितों की रक्षा के लिए भारतीय नौसेना की पेशेवर क्षमता और संचालन संबंधी तैयारियों को प्रदर्शित किया है। उन्होंने कहा कि भारत हिंद महासागर क्षेत्र में संकट के समय सहायता पहुंचाने वाले देश, पसंदीदा सुरक्षा साझेदार और विश्वास तथा भरोसे के प्रतीक के रूप में मजबूती से खड़ा है। इससे भारत का ‘महासागर’ दृष्टिकोण और मजबूत हो रहा है। रक्षा मंत्री ने कहा कि दक्षिण चीन सागर, भूमध्य सागर और अटलांटिक महासागर में भारतीय युद्धपोतों की मौजूदगी देश की ब्लू-वॉटर नौसैनिक क्षमता को दर्शाती है।

श्री सिंह ने तैयारी बनाए रखने के लिए भारतीय नौसेना की सराहना की। उन्होंने कहा कि वर्ष 2047 तक विकसित भारत के संकल्प को साकार करने में नौसेना रणनीतिक आधार के रूप में काम कर रही है। उन्होंने कहा कि भारत की समुद्री शक्ति का उद्देश्य केवल समुद्र में राष्ट्रीय ध्वज प्रदर्शित करना नहीं है। साथ ही यह सुनिश्चित करना है कि जहां भी तिरंगा दिखाई दे, वहां सुरक्षा, विश्वास और भरोसे का संदेश भी पहुंचे।

श्री सिंह ने कहा कि हिंद महासागर क्षेत्र और उससे आगे भारतीय नौसेना की उपस्थिति, भारत के महासागर दृष्टिकोण को और मजबूती प्रदान कर रही है।