कलकत्ता उच्च न्यायालय ने खुशबाग कब्रिस्तान सहित मुर्शिदाबाद में कई मस्जिदों और कब्रिस्तानों के कर्मचारियों के मामूली वेतन पर हैरानी जाहिर की है। रिकॉर्ड के अनुसार 26 विभिन्न पदों पर कार्यरत कर्मियों को मासिक रूप से 22 रूपए, 9 रूपए, 7 रूपए और यहां तक कि 5 रूपए वेतन दिया जा रहा है। राज्य सरकार ने यह माना है कि उसे इस मुद्दे के बारे में पता था पर दावा किया वे इसमें हस्तक्षेप नहीं कर सकती। केंद्र सरकार ने कहा है कि ये वेतन ब्रिटिश शासन के दौरान राजनीतिक पेंशन के रूप में निर्धारित है जिन्हें मौजूदा प्रावधानों के अंतर्गत बढ़ाया नहीं जा सकता।
न्यायमूर्ति अमृता सिन्हा ने केंद्र सरकार को नोटिस भेजने का निर्देश दिया है। मामले की अगली सुनवाई चार मई को होगी। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि 1997 में नियुक्त कर्मियों ने बार-बार वेतन में संशोधन की मांग की और वर्ष 2012 को राज्य और केंद्र सरकार के अधिकारियों से अपील की लेकिन उनकी मांगों को खारिज कर दिया गया।