ब्रिक्स सदस्य देशों के विदेश मंत्रियों ने वैश्विक शासन में सुधार और उसे बेहतर बनाने के लिए अपनी प्रतिबद्धता दोहराई है। ब्रिक्स विदेश मंत्रियों की बैठक के बाद जारी वक्तव्य में कहा गया है कि सदस्य देशों ने एक न्यायसंगत, वैध, लोकतांत्रिक और जवाबदेह अंतर्राष्ट्रीय और बहुपक्षीय प्रणाली को बढ़ावा देने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई है। मंत्रियों ने ध्रुवीकरण और अविश्वास के वर्तमान वैश्विक संदर्भ को देखते हुए अंतर्राष्ट्रीय शांति और सुरक्षा को मज़बूत करने के लिए वैश्विक कार्रवाई को प्रोत्साहित करने को कहा। उन्होंने अंतर्राष्ट्रीय समुदाय से इन चुनौतियों और उनसे जुड़े सुरक्षा खतरों का जवाब राजनीतिक-राजनयिक उपायों के ज़रिए देने का आह्वान किया। उन्होंने संघर्ष की रोकथाम के प्रयासों में शामिल होने की आवश्यकता पर भी बल दिया। इसमें संघर्ष के मूल कारणों को संबोधित करना भी शामिल है। मंत्रियों ने बहुपक्षवाद को बनाए रखने की अपनी प्रतिबद्धता पर बल दिया।
विदेश मंत्रियों ने अंतर्राष्ट्रीय कानून के अनुसार लाल सागर और बाब अल-मंडेब जल डमरू मध्य में सभी देशों के जहाज़ों के नौवहन अधिकारों और स्वतंत्रताओं के प्रयोग को सुनिश्चित करने के महत्व पर बल दिया।
उन्होंने नवाचार को बढ़ावा देने, तकनीकी सहयोग को आगे बढ़ाने और ब्रिक्स की पहलों और आदान-प्रदान के माध्यम से स्टार्ट-अप और एस एम ई के बीच जुड़ाव को बढ़ावा देने में ब्रिक्स अर्थव्यवस्थाओं की महत्वपूर्ण भूमिका को रेखांकित किया।
विदेश मंत्रियों ने इस बात की सराहना की कि भारत की अध्यक्षता में ब्रिक्स ‘मानवता और लोगों को केंद्र में रखने’ के अध्यक्ष के दृष्टिकोण के साथ निरंतर जुड़ाव के माध्यम से सहयोग बढ़ाने में और अधिक योगदान देगा।
नई दिल्ली में बैठक के बाद विदेश मंत्रालय में आर्थिक संबंध मामलों के सचिव सुधाकर दलेला ने कहा कि ब्रिक्स के सभी सदस्य और सहयोगी देश ‘लचीलापन, नवाचार, सहयोग और स्थिरता के लिए निर्माण’ के लिए भारत की अध्यक्षता की प्राथमिकताओं की बहुत सराहना और समर्थन किया। श्री दलेला ने कहा कि ब्रिक्स सदस्य देश ब्रिक्स के तीन स्तंभों – सुरक्षा, आर्थिक और वित्तीय सहयोग, और सांस्कृतिक तथा लोगों के बीच संबंधों – के अंतर्गत चर्चा किए गए लगभग सभी मामलों पर आम सहमति बनाने में सफल रहे।