जामिया मिल्लिया इस्लामिया विश्वविद्यालय और यूनिसेफ इंडिआ द्वारा दो दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस कार्यशाला का उद्देश्य डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म के ज़रिए टीकाकरण और गैर-संक्रामक रोगों पर जन स्वास्थ्य संचार को मज़बूत करना था। साथ ही, बच्चों और किशोरों में गैर-संक्रामक रोगों से निपटने के लिए रोकथाम, शुरुआती जागरूकता और स्वस्थ व्यवहारों के बढ़ते महत्व पर बल देना था। जामिया के सेंटर फॉर इनोवेशन और एंटरप्रेन्योरशिप द्वारा आयोजित इस कार्यशाला मे 30 से अधिक विद्यार्थी, रेडियो जॉकी और मीडिया जगत से आए प्रतिनिधी शामिल हुए।
इस अवसर पर, जामिया के रजिस्ट्रार प्रोफेसर मोहम्मद महताब आलम रिज़वी ने कहा कि अनुभवात्मक शिक्षा और सामाजिक जुड़ाव के लिए सहयोगी अकादमिक मंच अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। उन्होंने कहा कि ऐसी पहलें छात्रों को इस काबिल बनाती हैं कि वे अपने ज्ञान को सार्वजनिक स्वास्थ्य से जुड़े मुद्दों पर प्रभावी संवाद में बदल सकें।
वहीं, यूनिसेफ इंडिया की कम्युनिकेशन, एडवोकेसी और पार्टनरशिप की प्रमुख ज़फ़रीन चौधरी ने कहा कि भारत का टीकाकरण कार्यक्रम हर साल लाखों बच्चों और गर्भवती महिलाओं तक पहुंचाना जारी रखे हुए है, जो इसकी मज़बूत प्रणालियों और प्रतिबद्धता को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि टीके हर पीढ़ी की रक्षा करते हैं और समानता का एक अहम पैमाना बने हुए हैं, खासकर उन बच्चों तक पहुँचने में जो अभी भी छूट जाते हैं।
जामिया के सेंटर फॉर इनोवेशन और एंटरप्रेन्योरशिप के निदेशक प्रोफेसर रिहान खान सूरी ने कहा कि शैक्षणिक संस्थान ज्ञान को व्यवहार से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इस सहयोग के माध्यम से, छात्र टीकाकरण और बचपन की गैर-संक्रामक बीमारियों जैसे सार्वजनिक स्वास्थ्य विषयों से सीधे जुड़ते हैं, और ऐसा संचार विकसित करते हैं जो साक्ष्य-आधारित और प्रासंगिक हो।