यमन की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त सरकार ने हूती विद्रोहियों के खिलाफ बड़ा सैन्य अभियान शुरू किया है। सरकारी बलों ने लाल सागर के तट पर प्रमुख रणनीतिक ठिकानों को अपने नियंत्रण में लेने का दावा किया है।
राष्ट्रपति परिषद के अध्यक्ष राशद अल-अलीमी ने इस अभियान को औपचारिक रूप से ऑपरेशन डॉन ऑफ यमन नाम दिया है। इसका उद्देश्य हूती नियंत्रण वाले इलाकों को वापस लेना, सरकारी संस्थाओं को बहाल करना और राजधानी सना पर फिर से नियंत्रण हासिल करना है। हूती समूह ने वर्ष 2014 से सना पर नियंत्रण कर रखा है। अल-अलीमी ने एक दिन पहले सैन्य अभियान शुरू करने की घोषणा की थी।
यमन के सशस्त्र बलों ने कहा है कि उन्होंने सादा, अल-जौफ, ताइज़ और पश्चिमी तट पर हूती ठिकानों के खिलाफ 1122 सटीक सैन्य अभियान चलाए। सैन्य प्रवक्ता कर्नल माजेद अब्दुल्ला अल-नुजैली ने बताया कि इन अभियानों में तोपखाने और रॉकेट लॉन्चर ठिकानों, रक्षा चौकियों, आपूर्ति मार्गों, सैन्य सहायता और कमान एवं नियंत्रण केंद्रों को निशाना बनाया गया। सरकारी बलों ने बाब अल-मंदब और धुबाब क्षेत्र के आसपास के ठिकानों पर नियंत्रण हासिल करने का भी दावा किया है।
सऊदी अरब यमन सरकार के इस सैन्य अभियान को महत्वपूर्ण सैन्य सहायता दे रहा है। सऊदी नेतृत्व वाले गठबंधन के प्रवक्ता मेजर जनरल तुर्की अल-मलिकी ने बताया कि इसके जवाब में 100 लड़ाकू विमानों ने हिस्सा लिया और गठबंधन यमन के बलों को लगातार हवाई सहायता दे रहा है। उन्होंने कहा कि 324 महत्वपूर्ण ठिकानों को नष्ट किया गया है।
इस घटनाक्रम के बाद मक्का रक्षा गठबंधन की आपात बैठक भी हुई, जिसमें सऊदी अरब, पाकिस्तान और तुर्किए शामिल हुए। तीनों देशों ने सामूहिक रक्षा संबंधी प्रतिबद्धताओं को लागू करने की दिशा में आगे बढ़ने पर सहमति जताई। इनमें मौजूदा व्यवस्थाओं और सदस्य देशों के राष्ट्रीय कानूनों के अनुरूप सऊदी अरब में सहमत सैन्य बलों और क्षमताओं की तेजी से तैनाती शामिल है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त सरकार, हूती नियंत्रण वाले इलाकों को वापस लेने की कोशिश कर रही है।