सितम्बर 25, 2026 1:36 अपराह्न

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उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन ने अंतर्राष्ट्रीय सामरिक सहभागिता कार्यक्रम में लिया हिस्सा, कहा- अलग-थलग रहकर चुनौतियों का समाधान संभव नहीं

उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन ने कहा है कि तेजी से परस्पर जुड़ती दुनिया में, उभरती चुनौतियों का प्रभावी ढंग से समाधान अलग-थलग रहकर नहीं किया जा सकता। श्री राधाकृष्णन ने आज उपराष्ट्रपति भवन में अंतर्राष्ट्रीय सामरिक सहभागिता कार्यक्रम के चौथे संस्करण के प्रतिभागियों से संवाद में यह बात कही। उन्‍होंने कहा कि एक पृथ्वी, एक परिवार और एक भविष्य का वसुधैव कुटुंबकम का भारतीय आदर्श विश्व के लोगों के सामूहिक कल्याण को दर्शाता है। उपराष्‍ट्रपति ने कहा कि ये दर्शन भारत की जी20 अध्यक्षता में स्‍पष्‍ट रूप से दिखाई दिया। 
 
उप-राष्ट्रपति ने ग्लोबल साउथ के 22 विकासशील देशों के 25 प्रतिनिधियों सहित सभी प्रतिनिधियों का स्वागत करते हुए कहा कि प्रौद्योगिकी, साइबर स्पेस, एआई, ऊर्जा और समुद्री सुरक्षा, जलवायु परिवर्तन तथा आपूर्ति श्रृंखला जैसी उभरती चुनौतियों से निपटने के लिए सामूहिक प्रयास जरूरी हैं। उन्होंने प्रतिभागियों से वैश्विक दृष्टिकोण अपनाने, रणनीतिक रूप से जुड़ने और एकजुट होकर काम करने का आह्वान किया।
 
राष्ट्रीय रक्षा महाविद्यालय के कमांडेंट एयर मार्शल मनीष कुमार गुप्ता ने कहा कि महाविद्यालय सामरिक शिक्षा का उत्‍कृष्‍ट केंद्र है। ये सशस्त्र बलों, सिविल सेवाओं के वरिष्ठ अधिकारियों और मित्र देशों के अधिकारियों के बीच सामरिक सोच और नेतृत्व को आकार देता है। उन्होंने कहा कि अंतर्राष्ट्रीय सामरिक सहभागिता कार्यक्रम का उद्देश्य क्षेत्रीय सुरक्षा को बढ़ावा देना और समान विचारधारा वाले देशों के बीच घनिष्ठ सहयोग को प्रोत्साहित करना है।