उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन ने कहा है कि आर्थिक मजबूती को सामाजिक मजबूती से अलग करके नहीं देखा जा सकता। उन्होंने कहा कि तेजी से बदलती दुनिया में समावेशिता ही मजबूती की बुनियाद है। श्री राधाकृष्णन नई दिल्ली में आज पांचवें कौटिल्य आर्थिक सम्मेलन के उद्घाटन सत्र को संबोधित कर रहे थे। सम्मेलन का विषय था- बदलते दौर में मजबूती।
उपराष्ट्रपति ने कहा कि आम सहमति, समावेशिता और परिस्थितियों के अनुरूप नीतियां बनाने से लोकतंत्र और विकास साथ-साथ आगे बढ़ सकते हैं और सतत विकास की मजबूत नींव तैयार हो सकती है। उन्होंने कहा कि वास्तविक मजबूती तभी है, जब कोई नागरिक, उद्यम या क्षेत्र पीछे न छूटे। उपराष्ट्रपति ने 2047 तक विकसित भारत के निर्माण के लिए सामूहिक प्रयासों का आह्वान किया।
श्री राधाकृष्णन ने तेजी से बदलती वैश्विक प्राथमिकताओं, उन्नत होती प्रौद्योगिकी और बढ़ती जलवायु चुनौतियों के बीच आम सहमति से निर्णायक फैसले लेने की आवश्यकता पर बल दिया। उपराष्ट्रपति ने कहा कि संकट के समय आम सहमति पर आधारित फैसलों की जरूरत और भी बढ़ जाती है। उन्होंने कहा कि बहस और चर्चा ज़रूरी तो हैं, लेकिन आखिर में उनसे कोई ऐसा नतीजा निकलना चाहिए जो सभी को मंज़ूर हो।