संयुक्त राष्ट्र के विशेषज्ञों ने अफ़गान शरणार्थियों को जबरन उनके देश वापस भेजने पर पाकिस्तान को चेतावनी दी है और अधिकारियों से कहा है कि शरणार्थियों को निर्वासित करने से पहले यह आकलन किया जाना चाहिए कि क्या अफगानिस्तान में ऐसे लोगों को उत्पीड़न, यातना या अन्य गंभीर मानवाधिकार उल्लंघनों का खतरा है। विशेषज्ञों ने पाकिस्तान के चिकित्सा और दंत चिकित्सा संस्थानों को अफ़गान छात्रों को वापस भेजने के निर्देश पर भी चिंता व्यक्त की है।
रिपोर्ट के अनुसार एक सौ अफ़गान छात्र, जिनमें 20 से 40 महिलाएं शामिल हैं, इससे प्रभावित हैं। विशेषज्ञों ने कहा कि तालिबान द्वारा महिलाओं के लिए उच्च शिक्षा और चिकित्सा प्रशिक्षण पर प्रतिबंध को देखते हुए, यह कदम महिला अफ़गान छात्रों के डॉक्टर और दंत चिकित्सक बनने की उम्मीदों को खत्म कर सकता है।
विशेषज्ञों ने कहा कि पाकिस्तान को अफ़गान नागरिकों, विशेषकर महिलाओं और बिना अभिभावक वाले बच्चों को, वापस न भेजने के सिद्धांत के अनुसार उन्हें अफगानिस्तान वापस भेजना बंद कर देना चाहिए। यह सिद्धांत उन लोगों को वापस भेजने पर रोक लगाता है जहां उन्हें उत्पीड़न, यातना या अन्य गंभीर और अपूरणीय क्षति का वास्तविक खतरा है।
उन्होंने पाकिस्तान के गृह मंत्रालय द्वारा इस वर्ष 28 जून को जारी उस निर्देश पर भी गंभीर चिंता व्यक्त की, जिसमें प्रांतीय अधिकारियों को 10 जुलाई के बाद अवैध अफगान नागरिकों को हिरासत में लेने और निर्वासित करने का निर्देश दिया गया था।
विशेषज्ञों के अनुसार, 10 जुलाई से 27 अगस्त के बीच लगभग एक लाख 27 हजार 344 अफगान नागरिक अफगानिस्तान वापस चले गए, जिनमें कम से कम 14 हजार 186 ऐसे थे जिन्हें कथित तौर पर जबरन निकाला गया था। सीमा पार करने वालों में लगभग 38 हजार 388 महिलाएं और बच्चे थे।