केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने हरियाणा के अंबाला में 1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम के शहीद स्मारक का उद्घाटन किया। उन्होंने कहा कि यह स्मारक युवा पीढ़ी में देशभक्ति की भावना जगाने के साथ ही स्वतंत्रता सेनानियों के बलिदान को सम्मान देने का काम करेगा।
करीब 594 करोड़ रुपये की लागत से 22 एकड़ में बने इस स्मारक में 22 दीर्घाएं हैं। इनमें ऐतिहासिक दस्तावेजों, पारंपरिक शिल्प और डिजिटल तकनीक के माध्यम से स्वतंत्रता संग्राम की घटनाओं को दर्शाया गया है। इस अवसर पर हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी और केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल भी उपस्थित थे।
श्री शाह ने अपने संबोधन में कहा कि 10 मई 1857 को अंबाला छावनी में क्रांतिकारियों ने अंग्रेजी शासन के खिलाफ सशस्त्र संघर्ष शुरू किया था। बाद में यह आंदोलन देश के विभिन्न हिस्सों में फैल गया और इसने ब्रिटिश साम्राज्य की नींव हिला दी।
उन्होंने 1857 की घटनाओं को केवल विद्रोह बताने वाले इतिहासकारों की आलोचना की। उन्होंने वीर सावरकर का उल्लेख करते हुए कहा कि इस संघर्ष को स्वतंत्रता के लिए युद्ध के रूप में देखा जाना चाहिए।
श्री शाह ने नाना साहेब पेशवा, रानी लक्ष्मीबाई, तात्या टोपे, बेगम हजरत महल और अन्य क्रांतिकारियों को श्रद्धांजलि दी। उन्होंने कहा कि 1857 से 1947 के बीच 90 वर्षों के दौरान अनगिनत स्वतंत्रता सेनानियों ने देश की आजादी के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर कर दिया।
गृह मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत अब विकसित राष्ट्र बनने के लक्ष्य की ओर बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि जो देश अपनी आजादी के महत्व को नहीं समझता और उसके लिए बलिदान देने वालों का सम्मान नहीं करता, वह प्रगति नहीं कर सकता। उन्होंने देशभर के युवाओं से अंबाला के इस स्मारक को देखने और स्वतंत्रता सेनानियों के बलिदान के बारे में जानने का आग्रह किया।
इस स्मारक में वर्चुअल रियलिटी, होलोग्राफी और इंटरैक्टिव प्रोजेक्शन के माध्यम से 1857 के घटनाक्रम को जीवंत रूप में दिखाया गया है। इसमें हरियाणा की फुलकारी और सरकंडे से बनी कलाकृतियों को भी स्थान दिया गया है। स्मारक परिसर में ढाई हजार दर्शकों की क्षमता वाला खुला थिएटर और लाइट एंड साउंड शो भी आकर्षण का हिस्सा हैं।