नवम्बर 6, 2026 6:20 पूर्वाह्न

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भारत 2030 तक गैर-जीवाश्म ईंधन से 190 गीगावाट बिजली उत्पादन क्षमता बढ़ाने के लिए 220 अरब डॉलर के निवेश का लक्ष्य पार कर सकता है: केंद्रीय मंत्री प्रल्हाद जोशी

केंद्रीय नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री प्रल्हाद जोशी ने उम्मीद जताई है कि भारत वर्ष 2030 तक गैर-जीवाश्म ईंधन से 190 गीगावाट बिजली उत्पादन क्षमता बढ़ाने के लिए 220 अरब डॉलर के निवेश का लक्ष्य पार कर सकता है।

श्री जोशी ने भारत नवीकरणीय ऊर्जा शिखर सम्मेलन-2026 के समापन पर मीडिया से बातचीत में कहा कि पिछले दो वर्षों में नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र में घरेलू निवेश और प्रत्यक्ष विदेशी निवेश सहित कुल सात लाख करोड़ रुपये का निवेश आया है। उन्होंने कहा कि निवेश की यह गति आगे भी जारी रहेगी और भारत निर्धारित समय पर 500 गीगावाट क्षमता का लक्ष्य हासिल कर लेगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के निर्देश के अनुसार, इसके अलावा 300 गीगावाट क्षमता और जोड़ने की रणनीति भी तैयार की जा रही है।

श्री जोशी ने बताया कि फिलहाल देश में गैर-जीवाश्म ईंधन स्रोतों से बिजली उत्पादन की स्थापित क्षमता 310 गीगावाट है। केंद्र सरकार ने वर्ष 2030 तक इसे बढ़ाकर 500 गीगावाट करने का लक्ष्य रखा है।

इस बीच, नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय के सचिव संतोष कुमार सारंगी ने कहा कि सरकार सौर मॉड्यूल के कचरे के पुनर्चक्रण के लिए नए दिशा-निर्देश तैयार कर रही है।

इस शिखर सम्मेलन का उद्घाटन प्रधानमंत्री ने 2 नवंबर 2026 को किया था। प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में कहा था कि नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र में भारत का लगातार बढ़ता निवेश वैश्विक संकटों के प्रभाव से देश को सुरक्षित रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। उन्होंने कहा कि नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र में हुआ निवेश कोविड महामारी और पश्चिम एशिया जैसे संकटों का प्रभाव काफी हद तक कम करने में सहायक सिद्ध हुआ है।