उपराष्ट्रपति सी पी राधाकृष्णन ने कहा कि सही मायने में विकसित भारत को अपने नागरिकों, पारिवारिक मूल्यों, चरित्रवान युवाओं और समाज में अनुकंपा पर विश्वास होना चाहिए। उन्होंने क्षमा याचना के लिए मनाए जाने वाले महापर्व क्षमापना समारोह में यह बात कही। इस समारोह का आयोजन नई दिल्ली में भगवान महावीर मेमोरियल कमेटी और जैन महासभम ने किया। उपराष्ट्रपति ने कहा कि यह क्षमा, मैत्री, अहिंसा और आंतरिक शुद्धि के सार्वभौम जीवन मूल्यों के उत्सव का अवसर है।
उपराष्ट्रपति ने कहा कि जैन परम्परा में क्षमा को आध्यात्मिक अनुशासन में परिवर्तित किया जाता है, जो आज समूची मानवता के लिए अत्यधिक प्रासंगिक है। जैन दर्शन के सार्वभौम संदेश पर बल देते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि मैत्री की शिक्षा हर जीव के लिए है और यह भारत की सदियों से चली आ रही वसुधैव कुटुम्बकम की विचारधारा के अनुरूप है।
उपराष्ट्रपति ने कहा कि विवादों और हिंसा भरे इस विश्व में भगवान महावीर की शिक्षा शांति, संवाद, सह-अस्तित्व और अनुकंपा का मार्ग दिखाती है। उन्होंने कहा कि अहिंसा सिर्फ शारीरिक हिंसा की अनुपस्थिति नहीं है बल्कि इसका तात्पर्य विचार, शब्द और कार्यों को भी हिंसा से मुक्त करना है।