रेलवे ने करीब 500 करोड़ रुपये की लागत से पूर्वी मध्य रेलवे के 44 किलोमीटर से अधिक लंबे मानसी-सहरसा खंड के दोहरीकरण को मंजूरी दे दी है। परियोजना से लाइन की क्षमता बढ़ेगी, परिचालन दक्षता में सुधार होगा और यात्रियों और माल ढुलाई की बढ़ती मांग को पूरा किया जा सकेगा। मानसी-सहरसा खंड वर्तमान में मानसी-सारागढ़ मार्ग पर एक सिंगल-लाइन कॉरिडोर है। इस खंड पर यात्री रेलगाडि़यों के साथ ही गेहूं, मक्का, गिट्टी, उबले चावल, सीमेंट, उर्वरक, चावल, नमक, रेत, पत्थर और चीनी जैसी आवश्यक वस्तुओं की ढुलाई होती है।
रेलवे ने पूर्वी रेलवे के आसनसोल डिवीजन के हाई डेंसिटी नेटवर्क-एचडीएन और हाईली यूटिलाइज्ड नेटवर्क-एचयूएन मार्गों पर स्थित 27 स्टेशनों या डिब्बों में रिले-आधारित इंटरलॉकिंग को इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग से बदलने की परियोजना को मंजूरी दे दी है। स्वीकृत कार्य में 28 रिले-आधारित इंटरलॉकिंग को अत्याधुनिक इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग प्रणालियों से बदला जाएगा। इससे ट्रेन संचालन की सुरक्षा, विश्वसनीयता और परिचालन दक्षता में उल्लेखनीय वृद्धि होगी। परियोजना की लागत चार सौ करोड़ रुपये से अधिक है।
रेलवे ने दक्षिण पूर्वी रेलवे में लगभग 200 करोड़ रुपये की लागत से शेष 48 फाइबर ऑप्टिकल फाइबर केबल-ओएफसी बिछाने की मंजूरी दे दी है। इससे देश में रेलवे नेटवर्क की डिजिटल संचार व्यवस्था मजबूत होगी। यह परियोजना दक्षिण पूर्वी रेलवे के चार प्रमुख डिवीजनों में 1600 किलोमीटर से अधिक मार्ग पर फाइबर ओएफसी कनेक्टिविटी प्रदान करेगी।