मेघालय विधानसभा के स्पीकर थॉमस ए. संगमा ने कहा है कि यूनाइटेड डेमोक्रेटिक पार्टी (यू डी पी) के आठ पूर्व विधायकों के भारतीय जनता पार्टी में विलय का प्रस्ताव अभी जांच के दायरे में है। इस पर कोई भी फैसला कानूनी राय मिलने और ज़रूरी प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही लिया जाएगा।
यह स्पष्टीकरण तब आया है जब इन आठ विधायकों ने 25 सितंबर को मेघालय विधानसभा को विलय का पत्र सौंपकर भाजपा में शामिल होने के अपने निर्णय की जानकारी दी थी।
कल इन आठ विधायकों से मिलने के बाद संवाददाताओं से बातचीत में श्री संगमा ने बताया कि उनके कार्यालय ने अभी तक उन्हें औपचारिक रूप से भाजपा विधायक के रूप पर मान्यता नहीं दी है, क्योंकि यह मामला अभी विचाराधीन है।
अध्यक्ष ने बैठक को सौहार्दपूर्ण बताया और कहा कि उन्होंने विधायकों को कार्यवाही की स्थिति और कोई भी फैसला लेने से पहले और जांच की ज़रूरत के बारे में बता दिया है।
संगमा ने आगे बताया कि यू डी पी ने इन आठ विधायकों को अयोग्य ठहराने की मांग करते हुए एक याचिका दायर की थी। हालांकि, याचिका में कुछ कमियां और खामियां पाई गई थीं, जिसके बाद यू डी पी नेतृत्व और बाकी चार विधायकों को इसे ठीक करके दोबारा जमा करने के लिए दस दिन का समय दिया गया था। यह तय समयसीमा आज समाप्त हो रही है।
उन्होंने कहा कि अयोग्यता याचिका पर फैसला करना उनकी तत्काल प्राथमिकता होगी और इस मामले की जांच लागू नियमों और संवैधानिक प्रावधानों के अनुसार की जाएगी।
अध्यक्ष ने यह भी पुष्टि की कि वह संबंधित उदाहरणों की जांच कर रहे हैं, जिनमें तृणमूल कांग्रेस और कांग्रेस से जुड़े पिछले राजनीतिक घटनाक्रम और इसी तरह के मामले में उनका पिछला फैसला भी शामिल है, जो अभी माननीय उच्च न्यायालय के समक्ष विचाराधीन है।
पूरी सावधानी बरतने की ज़रूरत पर बल देते हुए श्री संगमा ने कहा कि अध्यक्ष का कार्यालय ऐसे मामलों में मनमाने ढंग से फैसला नहीं ले सकता और कानूनी तथा प्रक्रियात्मक पहलुओं की जांच के लिए पर्याप्त समय की ज़रूरत होती है।
श्री संगमा ने राजनीतिक पार्टी के विलय को मान्यता देने और पार्टी के बंटवारे की जांच के बीच अंतर भी स्पष्ट किया और कहा कि बाद वाला मामला उनके कार्यालय के विचाराधीन है।
अध्यक्ष ने दोहराया कि वह संबंधित दस्तावेजों की जांच करने और ज़रूरी कानूनी राय मिलने के बाद ही आगे बढ़ेंगे। उन्होंने कहा कि मामले में आगे बढ़ने से पहले उनकी पहली प्राथमिकता यू डी पी की अयोग्यता याचिका पर फ़ैसला करना है।