जम्मू-कश्मीर प्रशासन ने आज वन अधिकारों से संबंधित दावों के निपटान को सुव्यवस्थित करने और साथ ही वन भूमि पर अनाधिकृत कब्जे पर रोक लगाने के लिए नए दिशानिर्देश जारी किए हैं। वन, पारिस्थितिकी और पर्यावरण विभाग द्वारा जारी आदेश में कहा गया है कि वन भूमि से संबंधित सभी कार्रवाई भारतीय वन अधिनियम, 1927 और अनुसूचित जनजाति और अन्य पारंपरिक वनवासी (वन अधिकार मान्यता) अधिनियम, 2006 का सख्ती से पालन करते हुए की जानी चाहिए।
यह निर्देश 30 जुलाई को जनजातीय मामलों के विभाग द्वारा जारी एक अलग पत्र के बाद आया है, जिसमें वन अधिकार अधिनियम के तहत लंबित दावों के निपटान की प्रक्रिया पहले ही निर्धारित की जा चुकी थी। जिला स्तरीय समितियों की अध्यक्षता करने वाले उपायुक्तों को निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार सभी लंबित दावों के निपटान में तेजी लाने का निर्देश दिया गया है। परिपत्र में यह भी अनिवार्य किया गया है कि भूमि की गलत पहचान और अतिव्यापी दावों से बचने के लिए वन और राजस्व अभिलेखों का मिलान किया जाए और क्षेत्रों का उचित सीमांकन किया जाए।