लोकसभा के पूर्व महासचिव और संविधान विशेषज्ञ सुभाष सी. कश्यप का कल नई दिल्ली में लंबी बीमारी के बाद निधन हो गया। वे 97 वर्ष के थे। उन्होंने 100 से अधिक पुस्तकों के लेखन का काम पूरा किया। वे 1983 से 1990 तक लोकसभा के महासचिव रहे।
उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन ने डॉ. कश्यप के निधन पर शोक व्यक्त किया है। उन्होंने कहा कि डॉ. कश्यप ने अपने शोध, लेखन और सार्वजनिक सेवा के माध्यम से भारत के संविधान और संसदीय लोकतंत्र की समझ में अमूल्य योगदान दिया।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा कि डॉ. कश्यप भारत के अग्रणी संवैधानिक विद्वानों में से एक थे, जिनका संसदीय और संवैधानिक चर्चा में योगदान समाज को समृद्ध करता है। प्रधानमंत्री ने कहा कि लोकतांत्रिक संस्थाओं को मजबूत करने के लिए उनका लेखन और प्रतिबद्धता उल्लेखनीय थी।
लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने कहा कि डॉ. कश्यप भारतीय संविधान और संसदीय प्रणाली के चलते-फिरते ज्ञानकोश थे। श्री बिरला ने कहा कि उनका निधन भारतीय संसदीय लोकतंत्र, संवैधानिक विमर्श और सार्वजनिक जीवन के लिए एक अपूर्णीय क्षति है।