अक्टूबर 28, 2026 7:01 पूर्वाह्न

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इज़रायल में संसदीय चुनाव में गतिरोध की स्थिति, गठबंधन वार्ता विफल होने पर नेतन्याहू बन सकते हैं कार्यवाहक प्रधानमंत्री

 
इज़रायल में संसदीय चुनाव में गतिरोध की स्थिति बनी हुई है। देश के तीनों प्रमुख टेलीविजन नेटवर्क ने अपने-अपने एग्जिट पोल दिए हैं। विपक्ष के नेता गादी आइज़ेनकोट के दल को प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के दल पर दो सीटों की मामूली बढ़त मिली है। अनुमान है कि आइज़ेनकोट के दल को 52 सीटें और नेतन्याहू के नेतृत्व वाले लिकुड गठबंधन को 50 सीटें मिलेंगी। 120 सदस्यीय संसद -क्नीसेट में बहुमत के लिए 61 सीट आवश्‍यक है। 
 
प्रक्रिया के तहत इन नतीजों से आइज़ेनकोट को सरकार बनाने का पहला मौका मिल सकता है। अनुमान है कि शेष 18 सीटें उन अरब पार्टियों को मिलेंगी जो किसी भी दल से संबद्ध नहीं हैं, और आइज़ेनकोट ने उनके साथ सरकार बनाने की संभावना को लगभग खारिज कर दिया है। वहीं, गठबंधन वार्ता विफल होने पर नेतन्याहू कार्यवाहक प्रधानमंत्री बने रह सकते हैं।
 
इज़रायल की केंद्रीय चुनाव समिति ने कहा कि मतदान प्रतिशत 77.7% रहा। यह पिछले 20-22 वर्षों में सबसे अधिक है। 2022 के चुनाव की तुलना में इस बार 7% अधिक मतदान हुआ है। हमास के नेतृत्व में 7 अक्टूबर, 2023 को हुए हमलों और उसके बाद गाजा, लेबनान और ईरान में हुई लड़ाई के बाद पहली बार मतदान हुआ है।
 
नेतन्याहू पिछले 30 वर्ष की अवधि में लगभग 19 वर्ष तक प्रधानमंत्री रहे हैं और उन्होंने कई राजनीतिक संकटों का सामना किया है। उनके विरोधियों ने उन्हें 2009 के बाद केवल एक बार पद से हटाया, लेकिन वे 18 महीने बाद उन्‍होंने फिर से सत्‍ता हासिल कर ली थी। नवीनतम एग्जिट पोल में आइज़ेनकोट के गुट को मामूली बढ़त दिखाई दे रही है, लेकिन किसी भी पक्ष को स्पष्ट बहुमत नहीं मिल रहा है। अंतिम मतगणना और उसके बाद होने वाली गठबंधन वार्ता से यह तय होगा कि इज़रायल की अगली सरकार कौन बनाएगा।