प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा है कि भारत को नवाचार के साथ भविष्य की तकनीकों को विकसित करने में विश्व का नेतृत्व करना चाहिए। नई दिल्ली में कल उभरता विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार सम्मेलन का उदघाटन करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि ‘विकसित भारत’ का निर्माण वैज्ञानिक अनुसंधान, खोज और नवाचार की भावना की मजबूत नींव पर होगा। प्रधानमंत्री ने बताया कि देश अपनी फास्ट ब्रीडर रिएक्टर तकनीक को तेजी से आगे बढ़ा रहा है। उन्होंने बताया कि कुछ महीने पहले ही, स्वदेशी 500-मेगावाट प्रोटोटाइप फास्ट ब्रीडर रिएक्टर ने सफलतापूर्वक फर्स्ट क्रिटिकैलिटी हासिल कर ली है, जिसके अंतर्गत यूरेनियम विखंडन की श्रृंखला प्रतिक्रिया पूरी तरह से स्थिर और आत्मनिर्भर हो जाती है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि विज्ञान की असली सफलता तब होती है जब वह प्रयोगशाला से बाहर निकलकर आम नागरिकों के जीवन को बेहतर बनाता है, बड़ी समस्याओं का समाधान करता है, और स्वास्थ्य सेवा, कृषि, शिक्षा, रोजगार तथा आपदाओं से निपटने की क्षमता को मजबूत करता है। उन्होंने यह भी बताया कि पिछले एक साल में, सरकार ने बाजार के उपयोग के लिए तैयार प्रयोगशाला तकनीकों के लिए 12 हजार करोड़ रुपये दिए हैं और निजी निवेशकों ने भी इतनी ही राशि यानी 12 हजार करोड़ रुपये का निवेश किया है। उन्होंने बताया कि सालाना पेटेंट फाइलिंग की संख्या पिछले साल बढ़कर लगभग डेढ़ लाख हो गई है जो दस साल पहले 50 हजार से भी कम थी। यह केवल आंकड़ों में वृद्धि नहीं, बल्कि एक गहरे संरचनात्मक बदलाव को दर्शाता है।
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत का लक्ष्य आत्मनिर्भर बनना और महत्वपूर्ण तकनीकों के क्षेत्र में अपनी सामर्थ्य बढ़ाना है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि 21वीं सदी का भारत एक नई सोच और नए आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि हमारा लक्ष्य भारत और दुनिया के लिए, आज और आने वाले कल के लिए नई तकनीकें विकसित करना है।
इस बीच, विज्ञान और प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा है कि भारत ने विज्ञान, नवाचार और तकनीकी क्षमताओं के क्षेत्र में अपनी एक विशेष जगह बनाई है, और दुनिया अब भारत को सम्मान और प्रशंसा की नजर से देख रही है। उन्होंने बताया कि इस अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में लोगों का उत्साह काफी ज्यादा है, जिसमें हजारों विशेषज्ञ और प्रतिनिधि भारत में आयोजित इस कार्यक्रम में हिस्सा ले रहे हैं। प्रधानमंत्री मोदी ने प्रदर्शनी के विभिन्न हिस्सों का अवलोकन किया और वहां मौजूद लोगों से बातचीत की।
इस प्रदर्शनी में लगभग 150 डीप-टेक स्टार्टअप्स के स्टॉल लगाए गए हैं। तीन दिन तक चलने वाले इस सम्मेलन में प्रमुख वैज्ञानिक, शोधकर्ता, शिक्षाविद, नीति-निर्माता, उद्योग जगत के दिग्गज, स्टार्टअप्स और अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञ भाग ले रहे हैं। वे उभरती हुई तकनीकों और भारत की विज्ञान, प्रौद्योगिकी तथा नवाचार से जुड़ी प्राथमिकताओं पर चर्चा करेंगे। यह चर्चा 12 अलग-अलग विषयों पर होगी, जिनमें एआई, जैव प्रौद्यैगिकी, विनिर्माण, स्वास्थ्य रक्षा, ऊर्जा, जलवायु और महासागर विज्ञान शामिल हैं। इन चर्चाओं का मुख्य केंद्र अनुसंधान की प्राथमिकताएं, राष्ट्रीय क्षमताएं और वैज्ञानिक प्रगति को व्यावहारिक उपयोग में बदलना होगा।