भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) ने कारोबार को आसान बनाने के उद्देश्य से विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (एफ.पी.आई) के लिए के.वाई.सी नियमों में बड़ी राहत दी है। नए दिशा-निर्देशों के अंतर्गत सेबी ने विभिन्न श्रेणियों के एफ.पी.आई के लिए के.वाई.सी की समीक्षा की अवधि बढ़ा दी है।
नए नियमों के अनुसार, कम जोखिम वाले देशों से आने वाले श्रेणी-एक के एफ.पी.आई और कुछ विशेष नियमों के अंतर्गत पंजीकृत उच्च जोखिम वाली संस्थाओं के लिए अब केवाईसी की समीक्षा हर आठ साल में करनी होगी।
अन्य श्रेणियों के एफ.पी.आई, जिनमें विनियमित संस्थाएं और कम जोखिम वाले देशों के श्रेणी-दो के निवेशक शामिल हैं, उनके लिए भी समीक्षा की अवधि बढ़ाकर आठ साल कर दी गई है। हालांकि, कुछ अन्य संस्थाओं के लिए यह अवधि दो साल ही रहेगी।
सेबी ने अनुपालन का बोझ कम करने के लिए एफ.पी.आई को पंजीकरण जारी रखने के समय जानकारी में बदलाव की सूचना देने या कोई बदलाव नहीं होने का घोषणा-पत्र जमा करने की अनिवार्यता भी समाप्त कर दी है।
अब एफ.पी.आई को अगले तीन साल के लिए अपना पंजीकरण जारी रखने के लिए उसकी अवधि समाप्त होने से कम से कम 15 दिन पहले निर्धारित डिपॉजिटरी प्रतिभागियों (डी.डी.पी) को जरूरी शुल्क देना होगा।
सेबी ने कहा है कि केवल सरकारी प्रतिभूतियों में निवेश करने वाले एफ.पी.आई और स्वागत (एफ.आई एफ.पी.)आई के लिए के.वाई.सी समीक्षा की मौजूदा अवधि में कोई बदलाव नहीं किया गया है। ये नए प्रावधान इस वर्ष एक दिसंबर से लागू होंगे।