चंडीगढ़ में मशहूर सुखना झील के राष्ट्रीय स्तर पर संरक्षित वेटलैंड में वैज्ञानिक तरीके से गाद हटाने का काम चल रहा है। उम्मीद है कि इससे झील की पानी जमा करने की क्षमता लगभग 5 दशमलव 4 हेक्टेयर-मीटर बढ़ जाएगी। साथ ही इसकी लंबे समय की इकोलॉजिकल सस्टेनेबिलिटी (पारिस्थितिक स्थिरता) भी बेहतर होगी।
इस बारे में कल चंडीगढ़ वेटलैंड अथॉरिटी की 5वीं बैठक में चर्चा हुई। बैठक की अध्यक्षता पंजाब के गवर्नर और चंडीगढ़ केंद्र शासित प्रदेश के प्रशासक गुलाब चंद कटारिया ने की। उन्होंने सुखना वेटलैंड के संरक्षण और वैज्ञानिक प्रबंधन के लिए शुरू की गई अलग-अलग पहलों की प्रगति की समीक्षा की।
उन्होंने सुखना वेटलैंड में आने वाले प्रवासी पक्षियों की स्थिति के बारे में भी जानकारी मांगी। साथ ही, उन्होंने संबंधित विभागों को निर्देश दिया कि वे प्रवासी पक्षियों की ज़्यादा विविधता और संख्या को आकर्षित करने के लिए उनके रहने की जगह की गुणवत्ता बेहतर बनाने के उचित उपाय तलाशें।