जून 25, 2026 11:06 पूर्वाह्न

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संविधान हत्या दिवस पर प्रधानमंत्री मोदी ने आपातकाल के खिलाफ संघर्ष करने वालों को श्रद्धांजलि दी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज आपातकाल के दौरान लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा के लिए दृढ़ संकल्पित रहे सभी लोगों को श्रद्धांजलि अर्पित की और उस काल को भारत के इतिहास के सबसे काले अध्यायों में से एक बताया। सोशल मीडिया पोस्ट में प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि आपातकाल संविधान पर सीधा हमला था। उन्होंने कहा कि इस दौरान नागरिक स्वतंत्रताएं निलंबित की गईं, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर अंकुश लगाया गया और राजनीतिक नेताओं, पत्रकारों और सामाजिक कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार किया गया। प्रधानमंत्री ने आगे कहा कि देश के लोकतंत्र की नींव रखने वाली संस्थाएं भी इस दौरान आक्रमण की चपेट में आईं।
 
प्रधानमंत्री ने कहा कि आपातकाल ने उन अनगिनत नागरिकों के असाधारण साहस को भी उजागर किया जिन्होंने चुप रहने से इनकार कर दिया और संविधान में निहित आदर्शों को कायम रखा। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि संविधान 140 करोड़ भारतीयों की आकांक्षाओं, अधिकारों और कर्तव्यों का प्रतीक है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि भारत न्याय, स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व के सिद्धांतों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है।
 
आज संविधान हत्या दिवस मनाया जा रहा है। यह दिवस 25 जून 1975 को लगाए गए आपातकाल की याद दिलाता है, जब देश में संवैधानिक अधिकार और लोकतांत्रिक मूल्य गंभीर रूप से प्रभावित हुए थे। यह दिन उन सभी लोगों को श्रद्धांजलि देने का अवसर भी है, जिन्होंने आपातकाल के दौरान दमन, उत्पीड़न और कठिन परिस्थितियों का सामना किया। इस अवसर पर देशभर में विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। जिसका उद्देश्य संविधान और लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा के महत्व को उजागर करना है।