अक्टूबर 5, 2026 7:46 पूर्वाह्न

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जब भारत की सुरक्षा और क्षेत्रीय अखंडता पर खतरा आया, रूस ने भारत का साथ दिया: विदेश मंत्री डॉक्‍टर एस. जयशंकर

विदेश मंत्री डॉक्‍टर एस. जयशंकर ने कहा है कि जब भारत की सुरक्षा और क्षेत्रीय अखंडता पर खतरा था, उस समय रूस ने कई तरह से भारत का साथ दिया। नई दिल्ली में हुए 62वें म्यूनिख सुरक्षा सम्मेलन में उन्होंने कहा कि जब दुनिया के कई देश भारत के पड़ोस में सैन्य शासन का समर्थन कर रहे थे, तब रूस के साथ भारत के संबंध बहुत अच्छे थे। उन्होंने कहा कि भारत-रूस संबंधों पर इस ऐतिहासिक विरासत का गहरा प्रभाव है।
 
डॉक्‍टर जयशंकर ने कहा कि आज दोनों देशों के संबंधों का दायरा बढ़ा है और अब यह आर्थिक साझेदारी का रूप भी ले चुका है। उन्होंने कहा कि भारत और रूस के बीच सैन्य, परमाणु ऊर्जा और अंतरिक्ष सहयोग के साथ-साथ बड़े पैमाने पर व्यापार और निवेश भी हो रहा है।
 
रूस-यूक्रेन संघर्ष को दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए विदेश मंत्री ने कहा कि भारत का रुख स्पष्ट है और वह इस संघर्ष का अंत चाहता है। उन्होंने कहा कि इसके लिए बातचीत और कूटनीति जरूरी है तथा दोनों पक्षों के बीच वार्ता होनी चाहिए।
 
डॉक्‍टर जयशंकर ने स्वीकार किया कि हाल के महीनों में भारत ने केवल शांति की अपील करने से आगे बढ़कर इस दिशा में कुछ और प्रयास किए हैं। उन्होंने कहा कि भारत ने रूस और यूक्रेन, दोनों के साथ बातचीत की है और समाधान की दिशा में मदद की कोशिश कर रहा है। इसकी शुरुआत काला सागर में जहाजों की सुरक्षित आवाजाही के मुद्दे से हुई है।