पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर को अपने प्रत्यक्ष नियंत्रण में लेने की पाकिस्तान सरकार की आशंकाओं के बीच वहां विरोध-प्रदर्शन तेज हो गए हैं। पाकिस्तानी अधिकारियों ने बातचीत का प्रस्ताव रखा है, लेकिन ज्वाइंट अवामी एक्शन कमेटी ने इसे स्वीकार नहीं किया है। कमेटी का कहना है कि बातचीत का कोई अर्थ नहीं है क्योंकि पाकिस्तान सरकार ने कभी अपने वायदे पूरे नहीं किए हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि बातचीत का प्रस्ताव इस्लामाबाद का दिखावा मात्र है, क्योंकि वह सब कुछ अपनी शर्तों पर सुलझाना चाहता है। उनका कहना है कि पाकिस्तानी सरकार की असली मंशा पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर पर पूर्ण नियंत्रण हासिल करना है।
समाचार एजेंसियों के अनुसार, पाकिस्तानी सत्ता प्रतिष्ठान के लिए मौजूदा विरोध-प्रदर्शनों से निपटना कठिन होता जा रहा है। इस बार विदेशों में रहने वाले पाकिस्तानी प्रवासी भी पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर में मानवाधिकारों के उल्लंघन और अत्याचारों के खिलाफ विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं।