रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा है कि युवाओं के लिए नीतियां बनाते समय उनकी आकांक्षाओं, आवश्यकताओं और बदलती परिस्थितियों को ध्यान में रखना आवश्यक है।
श्री सिंह ने आज नई दिल्ली में नरेंद्र मोहन व्याख्यान में यह बात कही। उन्होंने कहा कि बदलते समय की जरूरतों के अनुरूप सरकार अब ‘युवाओं के लिए नीति’ से आगे बढ़कर ‘युवाओं द्वारा नीति’ और ‘युवाओं के साथ नीति’ की दिशा में आगे बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में असहमति व्यक्त करना अधिकार है, लेकिन अराजकता फैलाना स्वीकार नहीं किया जाएगा।
रक्षा मंत्री ने कहा कि संवैधानिक संस्थाओं की जवाबदेही लोकतंत्र का अभिन्न अंग है, लेकिन जानबूझकर उनकी विश्वसनीयता को कमजोर करना स्वीकार नहीं किया जा सकता। श्री राजनाथ सिंह ने विभिन्न पीढ़ियों के बीच संवाद को ‘पीढ़ियों के बीच अंतर’ के बजाय ‘पीढ़ियों का संगम’ बताया। उन्होंने कहा कि भारतीय जनता पार्टी में अपने राजनीतिक जीवन के दौरान उन्हें अलग-अलग पीढ़ियों के नेताओं के साथ काम करने का अवसर मिला।
भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन के नेतृत्व का उल्लेख करते हुए श्री सिंह ने कहा कि युवा पीढ़ी नए विचार और दृष्टिकोण लेकर आती है। उन्होंने कहा कि विभिन्न आयु वर्ग के लोग एक-दूसरे से बहुत कुछ सीख सकते हैं।
रक्षा मंत्री ने उत्तर प्रदेश सरकार में मंत्री रहते हुए अधिकारियों के साथ काम करने के अपने अनुभव भी साझा किए। उन्होंने कहा कि आज उनके साथ काम करने वाले कई अधिकारी उनसे 25 से 30 वर्ष छोटे हैं। हालांकि, उन्होंने उम्र के इस अंतर को विभिन्न पीढ़ियों के विचारों और अनुभवों के संगम का अवसर बताया।