अक्टूबर 29, 2026 7:59 अपराह्न

printer

विश्व स्ट्रोक दिवस पर केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने लक्षणों को नज़रअंदाज़ न करने की सलाह दी

आज विश्व स्ट्रोक दिवस मनाया जा रहा है। इसका उद्देश्य स्ट्रोक यानी मस्तिष्क में रक्त का प्रवाह बाधित होने या रक्तस्राव होने की स्थिति के प्रति जागरूकता बढ़ाना और इसके शुरुआती लक्षणों की पहचान के महत्व को समझाना है। इस वर्ष का संदेश है – हर मिनट महत्वपूर्ण है, स्ट्रोक के लक्षण पहचानें। इस अवसर पर स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्री जगत प्रकाश नड्डा ने कहा कि चेहरे का अचानक एक ओर झुक जाना, बांह में कमजोरी आना या बोलने में परेशानी होना जैसे लक्षणों को कभी नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। उन्होंने कहा कि तुरंत चिकित्सा सहायता लेने से मरीज के ठीक होने की संभावना में महत्वपूर्ण अंतर आ सकता है। श्री नड्डा ने लोगों से स्ट्रोक के शुरुआती लक्षणों की जानकारी रखने, जागरूकता फैलाने और ऐसे लक्षण दिखने पर तुरंत कार्रवाई करने की अपील की। उन्होंने कहा कि स्ट्रोक के मामले में हर मिनट महत्वपूर्ण होता है।

अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स), नई दिल्ली के न्यूरोसाइंसेज सेंटर के प्रमुख डॉ. शैलेश बी. गायकवाड़ ने आकाशवाणी समाचार से बातचीत में कहा कि स्ट्रोक एक गंभीर आपात स्थिति है। इसमें मस्तिष्क के किसी हिस्से में खून की आपूर्ति रुक जाती है या मस्तिष्क की कोई रक्त वाहिका फट जाती है। उन्होंने कहा कि देश में हर साल स्ट्रोक के लगभग 18 लाख मामले सामने आते हैं। ऐसे में जागरूकता से लोगों की जान बचाई जा सकती है। डॉ. गायकवाड़ ने बताया कि स्ट्रोक के लक्षणों में अचानक दिखाई देना बंद होना या धुंधला दिखाई देना, संतुलन बिगड़ना और चलने में परेशानी होना शामिल हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे लक्षण दिखाई देने पर मरीज को तुरंत ऐसे अस्पताल ले जाना चाहिए, जहां स्ट्रोक के इलाज की उचित व्यवस्था हो।

डॉ. गायकवाड़ ने बताया कि उच्च रक्तचाप स्ट्रोक के प्रमुख कारणों में से एक है। इसके अन्य जोखिम कारकों में मधुमेह, कोलेस्ट्रॉल का बढ़ना, हृदय संबंधी कुछ बीमारियां, धूम्रपान, अत्यधिक शराब का सेवन, मोटापा, शारीरिक गतिविधियों की कमी और अस्वस्थ खान-पान शामिल हैं। उन्होंने कहा कि उम्र बढ़ने के साथ स्ट्रोक का खतरा बढ़ता है, लेकिन यह किसी भी उम्र में हो सकता है। उन्होंने नियमित स्वास्थ्य जांच कराने और इन जोखिम कारकों को नियंत्रण में रखने की सलाह दी।