पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के सचिव नरेंद्र भूषण ने विकसित भारत-2047 के लक्ष्य को हासिल करने के लिए आजीविका की रक्षा करते हुए तटीय क्षेत्रों को जलवायु परिवर्तन के प्रभावों से निपटने में सक्षम बनाने पर बल दिया है।
नई दिल्ली में तटीय क्षेत्रों को जलवायु परिवर्तन के प्रभावों से बचाने पर आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला में पर्यावरण सचिव नरेंद्र भूषण ने तटीय क्षेत्रों में जलवायु संबंधी खतरों से निपटने पर बल दिया। उन्होंने कहा कि मैंग्रोव वन, समुद्री घास, दलदली क्षेत्र और प्रवाल भित्तियां जैव विविधता की रक्षा, आजीविका को सहारा देने और तटीय क्षेत्रों को सुरक्षित रखने में महत्वपूर्ण हैं। श्री भूषण ने कहा कि भारत ने समुद्र तटों में बदलाव और तटीय क्षेत्रों की संवेदनशीलता का वैज्ञानिक आकलन किया है। अब इस जानकारी का उपयोग बेहतर योजना बनाने, बुनियादी ढांचे के विकास और निवेश संबंधी फैसलों में किया जाना चाहिए। यूएनडीपी की भारत में आवासीय प्रतिनिधि डॉ. एंजेला लुसिगी ने कहा कि तटीय पारिस्थितिकी तंत्र की बहाली से आजीविका मजबूत करने और महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने में मदद मिलती है।
यह कार्यशाला हरित जलवायु कोष की परियोजना के अंतर्गत आयोजित की जा रही है, जिसका उद्देश्य तटीय पारिस्थितिकी तंत्र को बहाल करना और जलवायु परिवर्तन से प्रभावित होने की आशंका वाले क्षेत्रों के समुदायों की आजीविका मजबूत करना है।