केंद्रीय विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने आज नई दिल्ली में ओडिशा के विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्री कृष्ण चंद्र पात्रा से मुलाकात की। इस मुलाकात के दौरान डॉ. सिंह ने ओडिशा के लिए एक एकीकृत रोडमैप प्रस्तुत किया। इसमें केंद्र सरकार के ‘दुर्लभ खनिज गलियारा’ प्रस्ताव, राज्य के समृद्ध समुद्री एवं तटीय संसाधन, जैव प्रौद्योगिकी पारिस्थितिकी तंत्र, अंतरिक्ष क्षमताएं और वैज्ञानिक संस्थानों का नेटवर्क शामिल हैं।
श्री पात्रा ने डॉ. सिंह को राज्य की विज्ञान और प्रौद्योगिकी प्राथमिकताओं से संबंधित कई प्रस्तावों की जानकारी दी। डॉ. जितेन्द्र सिंह ने कहा कि पूर्वी तटीय क्षेत्र भारत के उभरते परमाणु और समुद्री रोडमैप में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है, और ये ओडिशा के केंद्रीय वैज्ञानिक संस्थानों और राज्य सरकार के समन्वित प्रयासों के ज़रिए इसमें योगदान करने की उपयुक्त स्थिति में है।
इस अवसर पर समुद्री जैव प्रौद्योगिकी के विस्तार, जीवन विज्ञान अवसंरचना को सुदृढ़ करने, ओडिशा के तटीय एवं खनिज संसाधनों के अधिक उपयोग, अंतरिक्ष अनुप्रयोगों और विनिर्माण, दुर्लभ खनिज, अन्वेषण, वैज्ञानिक अवसंरचना और राष्ट्रीय समुद्री-पर्यावरण पहलों में तटीय जिलों की भागीदारी जैसे विषयों पर चर्चा हुई। बैठक में भुवनेश्वर में इंस्टीट्यूट ऑफ लाइफ साइंसेज के विस्तार को अंतिम रूप दिया गया, जिसमें ओडिशा सरकार की ओर से अतिरिक्त 50 एकड़ भूमि का प्रावधान शामिल था।
बैठक में आगामी स्वच्छ सागर, सुरक्षित सागर अभियान में ओडिशा की भागीदारी और राज्य द्वारा हाल ही में शुरू किए गए ओडिशा डीप सी फिशिंग मिशन पर भी चर्चा हुई। इसका उद्देश्य अपतटीय और गहरे समुद्र में मत्स्य पालन की क्षमता को उजागर करना और समुद्री अर्थव्यवस्था के आसपास मजबूत मूल्य श्रृंखला को विकसित करना है। दोनों नेताओं ने इन पहलों को आगे बढ़ाने के लिए केंद्र-राज्य समन्वय के महत्व पर सहमति व्यक्त की।