विदेश मंत्रालय में पश्चिमी मामलों के सचिव सिबी जॉर्ज ने न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा के 81वें सत्र में समुद्र के बढ़ते जलस्तर से उत्पन्न अस्तित्वगत खतरों पर आयोजित उच्च स्तरीय पूर्ण बैठक में भारत का प्रतिनिधित्व किया।
श्री जार्ज ने समुद्र के बढ़ते जलस्तर पर संयुक्त राष्ट्र घोषणा को अपनाए जाने का स्वागत किया और तटीय क्षेत्रों को जलवायु परिवर्तन के प्रभावों से बचाने, मैंग्रोव संरक्षण तथा आपदा-रोधी बुनियादी ढांचे के क्षेत्र में भारत के प्रयासों को रेखांकित किया। उन्होंने समानता तथा साझा जिम्मेदारियों और संबंधित क्षमताओं के महत्व को दोहराया।
सिबी जॉर्ज ने समुद्री कानून पर संयुक्त राष्ट्र सम्मेलन-यूएनसीएलओएस, स्थिर समुद्री क्षेत्रों और द्वीपीय तथा तटीय देशों के राज्य के दर्जे की निरंतरता के महत्व पर भी बल दिया।
इससे पहले विदेश मंत्रालय में आर्थिक संबंध सचिव सुधाकर डलेला ने ‘सेंडाई फ्रेमवर्क को लागू करना : समावेशी आपदा और जलवायु लचीलापन के लिए आसियान दृष्टिकोण’ विषय पर आयोजित कार्यक्रम में भारत का पक्ष रखा। इसका आयोजन थाईलैंड, फिलीपींस, जापान और संयुक्त राष्ट्र आपदा जोखिम न्यूनीकरण कार्यालय ने किया था।
श्री डलेला ने भारत की मजबूत प्रारंभिक चेतावनी प्रणालियों, जोखिम आधारित बुनियादी ढांचे और आपदा तैयारियों के साथ-साथ आपदा रोधी बुनियादी ढांचे के लिए गठबंधन तथा आपदा तैयारियों और प्रतिक्रिया के क्षेत्र में भारत-आसियान सहयोग को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि प्रारंभिक चेतावनियों के बाद समय पर कार्रवाई में बदलना जरूरी है। श्री डलेला ने 2030 में चौथे संयुक्त राष्ट्र आपदा जोखिम न्यूनीकरण विश्व सम्मेलन की मेजबानी की भारत की पेशकश को भी दोहराया।
विदेश मंत्रालय में आर्थिक संबंध सचिव ने संयुक्त राष्ट्र में आयोजित अल्प विकसित देशों की वार्षिक मंत्रिस्तरीय बैठक में भी भाग लिया। उन्होंने अल्प विकसित देशों के साथ भारत की निरंतर साझेदारी की पुष्टि की।