बलूच वॉयस फॉर जस्टिस (बीवीजे) ने पाकिस्तान की एक आतंकवाद-रोधी अदालत द्वारा मानवाधिकार अधिवक्ताओं ईमान मजारी और हादी अली चट्टा को दस साल की जेल की सजा सुनाने पर कड़ी निंदा की है। संगठन ने इस फैसले पर चिंता जताते हुए पाकिस्तान में न्यायपालिका की स्वतंत्रता और मानवाधिकारों की पैरवी करने के अधिकार पर सवाल उठाए हैं।
बीवीजे ने कहा है कि पाकिस्तान की न्याय व्यवस्था न्याय देने के बजाय असहमति की आवाजों को दबाने का माध्यम बन रही है। संगठन ने कहा कि दोनों अधिवक्ता ने जबरन लापता किए गए लोगों के मामलों की पैरवी की थी और बलूच तथा पश्तून कार्यकर्ताओं के साथ एकजुटता जताई थी।
एमनेस्टी इंटरनेशनल का हवाला देते हुए संगठन ने कहा कि दोनों अधिवक्ता को निष्पक्ष और पारदर्शी सुनवाई के अधिकार से वंचित रखा गया है। बीवीजे ने अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों, संयुक्त राष्ट्र की संबंधित संस्थाओं और वैश्विक कानूनी समुदाय से इस मामले की समीक्षा करने की अपील की है।
संगठन ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से दोनों अधिवक्ता की तत्काल रिहाई की मांग उठाने, न्यायपालिका की स्वतंत्रता सुनिश्चित करने और पाकिस्तान में मानवाधिकारों के उल्लंघन को रोकने के लिए प्रभावी कदम उठाने का आग्रह किया है।